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आज तीसरी दुनिया के विकासशील देशों में दे...

आज तीसरी दुनिया के विकासशील देशों में देश के आधुनिकीकरण और विकास में रूचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए भूमण्डलीकरण एक मोहक शब्द है | अमेरिका तथा उसकी बिरादरी के एकाधिकारवादी बड़े पूँजीवादी देशों ने गरीबी से संघर्ष कर रहे विकासशील देशों के त्वरित विकास के लिए इसे एक कारगर और प्रभावी उपाय के रूप में प्रचारित किया है | विकास के प्रश्न को केवल अर्थशास्त्र की दृष्टि से देखने वाले इन बड़े राष्ट्रों का मानना है कि सकल राष्ट्रीय उत्पाद और राष्ट्रीय आय की वृद्धि में इसकी भूमिका चमत्कारिक है | इस अर्थ में भूमण्डलीकरण आज विश्व में विकास का नया और आकर्षक नारा बन गया है | किसी देश की अर्थव्यवस्था को अन्य देशों की अर्थव्यवस्था से संबद्ध कर उसे विश्वव्यापी बनाना | इसके लिए सभी वस्तुओं के आयात की खुली छूट, सीमा शुल्क में कमी, विदेशी पूँजी के मुक्त परवाह की अनुमति, सेवा क्षेत्र विशेषकर बैंकिंग, बीमा तथा जहाजरानी क्षेत्रों में विदेशी पूँजी-निवेश आदि उदार अर्थनीतियों को अपनाना आवश्यक है | आर्थिक उदारीकरण भूमण्डलीकरण की आधारभूत शर्त है जिसके बिना देश की अर्थव्यवस्था को विश्वव्यापी आयाम नहीं दिया जा सकता | उदारीकरण का अर्थ है-देश के उद्योग, व्यापार, लघु उद्योग और निर्यात की उपेक्षा कर देश में विदेशी उद्योग व व्यापार स्थापित करने एवं आयात को बढ़ावा देने की उदारता बरतना | इस प्रकार भूमण्डलीकरण निर्यात की तुलना में आयात तथा स्वदेशी उद्योग-धन्धों की अपेक्षा विदेशी उद्योग-धन्धों को प्रोत्साहन देने की आधारभूत नीति को अपनाकर चलता है, जो किसी भी राष्ट्र के हित में नहीं है | विश्व के बड़े पूँजीवादी राष्ट्रों ने भूमण्डलीकरण को विकासशील देशों के लिए एक अद्भुत वरदान माना है जोकि वह उन देशों के विकास के लिए अलादीन का चिराग हो
भूमण्डलीकरण में

A

विकासशील देशों का त्वरित विकास होता है |

B

स्वदेशी उद्योग-धन्धों को प्रोत्साहन मिलता है |

C

निर्यात को प्रोत्साहन मिलता है |

D

विदेशी उद्योग-धन्धों को प्रोत्साहन मिलता है |

लिखित उत्तर

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