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Class 14
HINDI
अभी तो मुकुट बँधा था माथ, हुए कल ही हल...

अभी तो मुकुट बँधा था माथ,
हुए कल ही हल्दी के हाथ,
खुले भी न थे लाज के बोल,
खिले थे चुम्बन-शून्य कपोल,
हाय रुक गया यहीं संसार
बना सिन्दूर अनल अंगार वातहत
लतिका वह सुकुमार
पड़ी है छिन्नाधार।'
उपरोक्त पंक्तियों में निहित रस है

A

संयोग श्रृंगार

B

करुण

C

शान्त

D

वियोग शृंगार

लिखित उत्तर

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