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एक तरफ भाषा हमारीको व्यवस्थित करती है, त...

एक तरफ भाषा हमारी___को व्यवस्थित करती है, तो दूसरी तरफ यह हमें ___भी करती है और हमें ज्ञान और कल्पना की अनखोजी दुनिया में ले जाती है |

A

संस्कृति, नियंत्रित

B

विचार-प्रक्रिया, सुसंकृत

C

जानकारी,मुक्त

D

विचार-प्रक्रिया, मुक्त

Text Solution

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The correct Answer is:
B
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भाषा हमारे/हमारी_____को व्यवस्थित करती है |

भाषा हमें___व्____की अनखोजी दुनिया में ले जाती है |

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। गाँव की छवि में क्या शामिल नहीं है?

प्रत्येक भाषा की पृष्ठभूमि में अवस्थित भाषिक व्यवस्था ही .......... और कार्यक्रमों को गढ़ती है तथा व्यक्ति के मानसिक क्रियाकलाप के लिए निर्देशन का कार्य करती है।

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, दूसरा मृगतृष्णा का है। बाजार की मृगतृष्णा शिक्षार्थी को लोभ-लालच देकर अपनी तरफ दौड़ाते रहने को विवश करने को उतारू खड़ी है। बाजार के इन ललचाने वाले रास्तों पर आकर्षण है, चकाचौंध है और सम्मोहित कर देने वाले सपने हैं। दूसरी तरफ शिक्षा तो साधना मार्ग है जो शांति दे सकता है, संतोष दे सकता है और हमारे आत्मतत्त्व को प्रबल करता हुआ विमल विवेक दे सकता है। निश्चित ही वह मार्ग श्रेयस्कर है, मगर अपनी ओर आकर्षित करने वाले बाजार का मार्ग प्रेयस्कर है। इस दोराहे पर खड़ा शिक्षार्थी बाजार को चुन लेता है। लाखों-करोड़ों लोग आज इसी रास्ते के लालच में आ गए हैं और शिक्षा के भँवरजाल में फंस गए हैं। बाजार की खूबी यही है कि वह फंसने का अहसास किसी को नहीं होने देता और मनुष्य लगातार फंसता चला जाता है। किसी को यह महसूस नहीं होता कि वह दलदल में हैं बल्कि महसूस यह होता है कि बाजार द्वारा दिए गए पैकेज के कारण वह सुखी है। अब यह अलग बात है कि सच्चा सुख क्या है? और सुख का भ्रम क्या है? जरूरत विचार करने की है। सवाल यह है कि बाजार विचार करने का भी अवकाश देता है या कि नहीं। ''दूसरी तरफ शिक्षा का साधना मार्ग है'' - तो पहली तरफ क्या है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपनी संस्कृति से परिचित होते है , वैसे ही अन्य भाषा पढ़कर उस संस्कृति का हमें परिचय मिलता है। साथ ही अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपने भाषा - भाषी लोगो से जुड़ते है , हमारे व्यक्तित्व का समाजीकरण होता है और हमारी दृष्टि की संकीर्णता कम हो जाते है उसी प्रकार अन्य भाषा पढ़कर हम अपने से ऊपर उठकर बाहर से जुड़ते है हमारे व्यक्तित्व का अंतराष्ट्रीयकरण होता है और हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है। इस तरह ,जैसे मातृभाषा - शिक्षण का महत्तम उदेशय व्यक्ति के व्यक्तित्व को 'स्व ' से उठाकर पुरे मातृभाषी समाज के उपयुक्त बनाना होता है वैसे ही अन्य भाषा -शिक्षण का महत्तम उदेश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को अंतराष्ट्रीय स्तर देना है जिस व्यक्ति ने जितनी अधिक अन्य भाषाएँ सच्चे अर्थो में सीखी होंगी , उसके व्यक्तित्व में यह मुक्तता और अंतराष्ट्रीय उतनी ही अधिक होगी। अन्य भाषा पढ़कर में

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपनी संस्कृति से परिचित होते है , वैसे ही अन्य भाषा पढ़कर उस संस्कृति का हमें परिचय मिलता है। साथ ही अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपने भाषा - भाषी लोगो से जुड़ते है , हमारे व्यक्तित्व का समाजीकरण होता है और हमारी दृष्टि की संकीर्णता कम हो जाते है उसी प्रकार अन्य भाषा पढ़कर हम अपने से ऊपर उठकर बाहर से जुड़ते है हमारे व्यक्तित्व का अंतराष्ट्रीयकरण होता है और हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है। इस तरह ,जैसे मातृभाषा - शिक्षण का महत्तम उदेशय व्यक्ति के व्यक्तित्व को 'स्व ' से उठाकर पुरे मातृभाषी समाज के उपयुक्त बनाना होता है वैसे ही अन्य भाषा -शिक्षण का महत्तम उदेश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को अंतराष्ट्रीय स्तर देना है जिस व्यक्ति ने जितनी अधिक अन्य भाषाएँ सच्चे अर्थो में सीखी होंगी , उसके व्यक्तित्व में यह मुक्तता और अंतराष्ट्रीय उतनी ही अधिक होगी। व्यक्तितत्व का अंतराष्ट्रीयकरण कब होता है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपनी संस्कृति से परिचित होते है , वैसे ही अन्य भाषा पढ़कर उस संस्कृति का हमें परिचय मिलता है। साथ ही अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपने भाषा - भाषी लोगो से जुड़ते है , हमारे व्यक्तित्व का समाजीकरण होता है और हमारी दृष्टि की संकीर्णता कम हो जाते है उसी प्रकार अन्य भाषा पढ़कर हम अपने से ऊपर उठकर बाहर से जुड़ते है हमारे व्यक्तित्व का अंतराष्ट्रीयकरण होता है और हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है। इस तरह ,जैसे मातृभाषा - शिक्षण का महत्तम उदेशय व्यक्ति के व्यक्तित्व को 'स्व ' से उठाकर पुरे मातृभाषी समाज के उपयुक्त बनाना होता है वैसे ही अन्य भाषा -शिक्षण का महत्तम उदेश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को अंतराष्ट्रीय स्तर देना है जिस व्यक्ति ने जितनी अधिक अन्य भाषाएँ सच्चे अर्थो में सीखी होंगी , उसके व्यक्तित्व में यह मुक्तता और अंतराष्ट्रीय उतनी ही अधिक होगी। मातृभाषा शिक्षण का महत्तम उदेश्य क्या है ?

BHARDWAJ ACADEMY-भाषा के कार्य एवं इसके विकास में बोलने एवं सुनने की भूमिका-अभ्यास प्रश्न
  1. भाषा एक विषय है |

    Text Solution

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  2. भाषा की प्रकृति के संबंध में कौन-सा कथन उचित नहीं है ?

    Text Solution

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  3. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?

    Text Solution

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  4. सृजनात्मकता का विकास करने में कौन-सा सहायक नही है ?

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  5. जो बच्चे सुन नही सकते

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  6. दैनिक कार्यो में मनुष्य किन दो कौशलो का सर्वाधिक प्रयोग करता है ?

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  8. इनमे से किस प्रतियोगिता के लिए मौखिक अभिव्यक्ति की आवश्यकता नही होती ह...

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  10. 'सुनना-बोलना' कौशलों के विकास के लिए सर्वोत्तम विधि कौन-सी हो सकती है?

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  11. विकास ने अपने क्षेत्र में आयोजित रंगारंग कार्यक्रम के विषय में अपने मि...

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  12. ध्वनियों के विभेदीकरण में सहायक है

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  16. भाषा सीखने में तब अधिक आसानी होती है, जब

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