Home
Class 14
HINDI
जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए ...

जागो फिर एक बार !
प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें
अरुण-पंख तरुण-किरण
खड़ी खोलती है द्वार
जागो फिर एक बार!
आँखें अलियों-सी
किस मधु की गलियों में फंसी,
बन्द कर पाँखें
पी रही हैं मधु मौन
अथवा सोई कमल-कोरकों में?
बन्द हो रहा गुंजार
जागो फिर एक बार!
अस्ताचल चले रवि,
शशि-छवि विभावरी में
चित्रित हुई है देख
यामिनीगन्धा जगी.
एकटक चकोर-कोर दर्शन-प्रिय,
आशाओं भरी मौन भाषा बहु भावमयी
घेर रहा चन्द्र को चाव से
शिशिर-भार-व्याकुल कुल
खुले फूल झुके हुए,
आया कलियों में मधुर
मद-उर-यौवन उभार
जागो फिर एक बार!
'तरुण' शब्द नीचे दिए गए किस विकल्प के अंतर्गत आता है?

A

संज्ञा

B

सर्वनाम

C

विशेषण

D

अव्यय

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
C

तरुण शब्द विशेषता बताता है। अतः यह विशेषण शब्द है।
Promotional Banner

Topper's Solved these Questions

  • अधिगम एवं अर्जन

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise अभ्यास प्रश्न (विगत वर्षो में पूछे गए प्रश्न)|18 Videos
  • अपठित गद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस गद्यांश (विगत वर्षो में पूछे गए प्रश्न )|150 Videos
BHARDWAJ ACADEMY-अपठित काव्यांश -अभ्यास प्रश्न
  1. जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण...

    Text Solution

    |

  2. जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण...

    Text Solution

    |

  3. जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण...

    Text Solution

    |

  4. जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण...

    Text Solution

    |

  5. जागो फिर एक बार ! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण...

    Text Solution

    |

  6. उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित काल रात्रि...

    Text Solution

    |

  7. उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित काल रात्रि...

    Text Solution

    |

  8. उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित काल रात्रि...

    Text Solution

    |

  9. उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित काल रात्रि...

    Text Solution

    |

  10. उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित काल रात्रि...

    Text Solution

    |

  11. उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित काल रात्रि...

    Text Solution

    |

  12. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

    Text Solution

    |

  13. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

    Text Solution

    |

  14. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

    Text Solution

    |

  15. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

    Text Solution

    |

  16. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

    Text Solution

    |

  17. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

    Text Solution

    |

  18. यह मधु है: स्वयं काल की मौना का युग-संचय, यह गोरसः जीवन-कामधेनु का...

    Text Solution

    |

  19. यह मधु है: स्वयं काल की मौना का युग-संचय, यह गोरसः जीवन-कामधेनु का...

    Text Solution

    |

  20. यह मधु है: स्वयं काल की मौना का युग-संचय, यह गोरसः जीवन-कामधेनु का...

    Text Solution

    |