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Class 14
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कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों...

कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी,
गोधूलि के धूमिल पट में दीपक के स्वर में दिपती-सी।
मंजुल स्वप्नों की विस्मृति में मन का उन्माद निखरता ज्यों
सुरभित लहरों की छाया में बुल्ले का विभव बिखरता ज्यों
वैसी ही माया में लिपटी अधरों पर उँगली घरे हुए,
माधव के सरस कुतूहल का आँखों में पानी भरे हुए।
नीरव निशीथ में लतिका-सी तुम कौन आ रही हो बढ़ती?
कोमल बाँहे फैलाये-सी आलिंगन का जादू पढ़ती?
किन इंद्रजाल के फूलों से लेकर सुहाग-कण-राग-भरे,
सिर नीचा कर हो गूंथ माला जिससे मधु धार ढरे?
पुलकित कदंब की माला-सी पहना देती हो अंतर में,
झुक जाती है मन की डाली अपनी फल भरता के डर में।
वरदान सदृश हो डाल रही नीली किरणों से बुना हुआ,
यह अंचल कितना हलका-सा कितना सौरभ से सना हुआ।
सब अंग मोम से बनते हैं कोमलता में बल खाती हूँ.
मैं सिमिट रही-सी अपने में परिहास-गीत सुन पाती हूँ।
स्मित बन जाती है तरल हँसी नयनों में भरकर बाँकपना,
प्रत्यक्ष देखती हूँ सब जो वह बनता जाता है सपना।
पुलकित शब्द में मूल शब्द क्या है?

A

पुल

B

पुलकी

C

पुलक

D

पलक

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
C

पुलक. शब्द में .इत. प्रत्यय के प्रयोग करने से .पुलकित. शब्द बना है। ,
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  1. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

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  2. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

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  3. कोमल किसलय के अंचल में नन्ही कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूलि के धूमिल...

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  5. यह मधु है: स्वयं काल की मौना का युग-संचय, यह गोरसः जीवन-कामधेनु का...

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