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शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल मुखरित देव...

शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल
मुखरित देवदारु कानन में
शोणित धवल भोज-पत्रों से
छाई हुई कुटी के भीतर
रंग-बिरंगे और सुगंधित
फूलों से कुंतल को साजे
इंद्रनील की माला डाले
शंख-सरीखे सुघड़ गलों में
कानों में कुवलय लटकाए
शतदल लाल कमल वेणी में
रजत-रचित मणि खचित कलामय
पान-पात्र द्राक्षासव पूरित
रखे सामने अपने-अपने
लोहित चंदन की त्रिपुटी पर
नरम निदाग बाल-कस्तूरी भृगछालों पर पलथी मारे
मदिरारुण आँखों वाले उन
उन्मद किन्नर-किन्नरियों की
मृदुल मनोरम अंगुलियों को
वंशी पर फिरते देखा है
बादल को घिरते देखा है।
कवि किन्नर-किन्नरियों की अंगुलियों को किस पर फिरते देखता है?

A

बाँसुरी

B

वीणा

C

सितार

D

हारमोनियम

Text Solution

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The correct Answer is:
A

कवि किन्नर-किारियों की अंगुलियों को बाँसुरी पर फिरते देखते है
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