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साधारण तौर पर शिक्षक यह समझते हैं कि बच्...

साधारण तौर पर शिक्षक यह समझते हैं कि बच्चों को लिखना तब सिखाना चाहिए जब उन्हें वर्गों की पहचान हो जाए। यह विचार पूरी तरह से

A

अवैज्ञानिक है

B

सही एवं स्वीकार्य है

C

वैज्ञानिक है

D

बाल स्वभाव के अनुकूल है

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The correct Answer is:
C

वर्णो की पहचान करने के बाद ही लिखना सीखना चाहिए। यह वैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब तक विद्यार्थी को वर्णों का सही ज्ञान नहीं होगा, वह शुद्ध रूप से लिखने में असमर्थ होगा। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ब्लूम के अनुसार ज्ञान एवं बोध स्तर के उपरांत ही बच्चे ज्ञान का उचित प्रयोग करते हैं।
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  • फरवरी 2016 पेपर II

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise बहुविकल्पीय प्रश्न |30 Videos
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जिन्होंने भी बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की है-चाहे वे माता-पिता हों या शिक्षक उनके खाते में सफलता के साथ-साथ असफलता और निराशा भी दर्ज होती है। ऐसे में एक सवाल उठता है कि आखिर इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना ? एक मुख्य समस्या तो यह है कि पढ़ाने वालों का विश्वास बच्चों की क्षमताओं या योग्यताओं पर काफी कम होता है। यह बात मैं यूँ ही नहीं कर रही बल्कि एक अभिभावक, एक शिक्षक और एक शिक्षक प्रशिक्षक होने के आधार पर कह रही हूँ कई बार मैं उस पाठ को लेकर बच्चों (दूसरी, तीसरी या फिर पाँचवीं) के सामने खड़ी होती हूँ जो मुझे उन्हें पढ़ाना है। मेरे पास कुछ जानकारी है जो मैं बच्चों को देना चाहती हूँ। लेकिन मैं यह जानकरी उन्हें क्यूँ देना चाहती हूँ? क्योंक मुझे लगता है कि वे इसके बारे में नहीं जानते, इसे जानने में उन्हें मजा आएगा, यह दुनिया के बारे में उनके नजरिए को विस्तृत करने में मदद करेगी, यह उन्हें बेहतर इन्सान बनने में मदद करेगी, भले ही थोड़ा-सा। लेकिन कभी-कभार पढ़ाना शुरू करने से पहले ही मेरे दिमाग में यह ख्याल बुदबुदाना शुरू कर देता है कि शायद उन्हें वह पहले से ही मालूम हो जो मैं उन्हें बताना चाहती हूँ, तो उन्हें कुछ बताने की बजाय मैं उनके सामने सवाल रख देती हूँ। 'आखिर इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना?' वाक्य को यदि हिन्दी की सामान्य वाक्य-रचना के अनुसार लिखा जाए, तो वाक्य होगा

BHARDWAJ ACADEMY-फरवरी 2018 पेपर I-बहुविकल्पीय प्रश्न
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