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भारतीय दर्शन सिखाता है कि जीवन का एक आशय...

भारतीय दर्शन सिखाता है कि जीवन का एक आशय और लक्ष्य है, उस आशय की खोज हमारा दायित्व है और अंत में उस लक्ष्य को प्राप्त कर लेना, हमारा विशेष अधिकार है। इस प्रकार दर्शन जो कि आशय को उद्घाटित करने की कोशिश करता है और जहाँ तक उसे इसमें सफलता मिलती है, वह इस लक्ष्य तक अग्रसर होने की प्रक्रिया है। कुल मिलाकर आखिर यह लक्ष्य क्या है? इस अर्थ में यथार्थ की प्राप्ति वह है जिसमें पा लेना, केवल जानना नहीं है, बल्कि उसी का अंश हो जाना है। इस उपलब्धि में बाधा क्या है? बाधाएँ कई है, पर इनमें कि प्रमुख है-अज्ञान अशिक्षित आत्मा नहीं हैं, यहाँ तक कि यथार्थ संसार भी नहीं है। यह दर्शन ही है जो उसे शिक्षित करता है और अपनी शिक्षा से उसे उस अज्ञान से मुक्ति दिलाता है, जो यथार्थ दर्शन नहीं होने देता है। इस प्रकार का दार्शनिक होना एक बौद्धिकअनुगमन करना नहीं है,। बल्कि एक शक्तिप्रद अनुशासन पर चलना है, क्योंकि सत्य की खोज में लगे हुए सही दार्शनिक को अपने जीवन को इस प्रकार आचरित करना पड़ता है। उस यथार्थ में एकाकार हो जाये, जिसे वह खोज रहा है ताकि वास्तव में, यही जीवन का एकमात्र सही मार्ग है और दार्शनिकों को इसका पालन करना होता है, और दार्शनिक ही नहीं बल्कि सभी मनुष्यों को, क्योंकि सभी मनुष्यों के दायित्व और निर्यात एक ही हैं।
दार्शनिक शब्द का बहुवचन रूप है।

A

दर्शनों

B

दार्शनिकों

C

बहुत से दार्शनिक

D

दर्शनवेत्ता

लिखित उत्तर

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