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Class 14
HINDI
जिस दिन मेरी चेतना जागो मैंने देखा हुआ...

जिस दिन मेरी चेतना जागो मैंने देखा
हुआ हूँ इस दुनिया के मेले में,
हर एक यहाँ पर एक भुलावे में भूला,
हर एक लगा है अपनी-अपनी दे-ले में,
कुछ देर रहा हक्का-बक्का, भौंचक्का-सा
आ गया कहाँ, क्या करूँ यहाँ जाऊँ किस जा?
फिर एक तरफ से आया हो तो धक्का सा,
मैंने भी बहना शुरू किया उस रेले में:
क्या बाहर की ठेला पेली ही कुछ कम थी,
जो भीतर भी भावों का ऊहा पोह मचा,
जो किया, उसी को करने की मजबूरी थी,
जो कहा वही मन के अंदर से उबल चला ।
जीवन को आपा-धापी में कब वक्त मिला.
कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँ.
जो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा-भला।
इस काव्यांश में चित्रण है

A

मनुष्य की स्वार्थपरकता का

B

मेले का

C

जीवन को भाग-दौड़ का

D

बाहरी द्वन्द्व का ।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C
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