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लोग स्वदेश-भक्ति की चर्चा करते हैं। मैं ...

लोग स्वदेश-भक्ति की चर्चा करते हैं। मैं स्वदेश-भक्ति में विश्वास करता हूँ, पर स्वदेश भक्ति के सम्बन्ध में मेरा एक आदर्श है। बड़े काम करने के लिए कई चीजों की आवश्यकता होती है। बुद्धि और विचार शक्ति हम लोगों की थोड़ी सहायता कर सकती है, वह हमको थोड़ी दूर अग्रसर करा देती है और वहीं ठहर जाती है, किन्तु हृदय के द्वारा ही महाशक्ति की प्रेरणा होती है। प्रेम असंभव को संभव कर देता है जगत के सब रहस्यों का द्वार प्रेम ही है। प्रेम, भक्ति के बिनादेव और ऋषियों की करोड़ों संतान पशु तुल्य हो गई हैं। आज करोड़ोंआदमी भूखे मर रहे हैं । आज राष्ट्र के समक्ष जो चुनौतियाँ हैं। उनसे आप अस्थिर हुये या अनियंत्रित हुये.या तुम्हारे हृदय के स्पंदन प्रभावित हआ या ऐसी बातों ने कभी तुम्हें पागल बनाया। क्या कभी तर निर्धनता और नाश का ध्यान आया है। क्या तुम अपने नामयश, सम्पत्ति यहाँ तक कि अपने शरीर को भी भूल गये हो? क्या तुम ऐसे हो गये हो, यदि हाँ तो जाने कि स्वदेश भक्ति की प्रथम सीढ़ी पर पैर रख दिया है। केवल अपनी शिक्षा, अपना रोजगार, अपनी बीमारी, अपनी परेशानियाँ आपको अनिद्रित किये हैं तो आप मनुष्यओर पशु का भेद मैसे कर पायेंगे। दूसरों की पीड़ा समझे बिना जब व्यक्ति अपने लिये ही जीता है तो वह पशुता के अलावा और कुछ भी नहीं है। आपत्ति-विपत्ति सभी पर आती हैं, लेकिन जब अपने ऊपर आई हुई आपत्तियों से हाहाकार करने लगते हैं तथा दूसरों पर आई हुई आपत्तियों में अपना मनोरंजन ढूँढते हैं तो हम पशुता से ऊपर नहीं हैं। सच्ची राष्ट्रभक्ति वह है जहाँ अपने देश के आदर्श, त्याग व सेवा भाव को अपनाकर गरीबों, भूखों व पीड़ितों की सेवा में अपने को अर्पित करने की लालसा का भाव और उत्साह विद्यमान हो। अभावग्रस्त की सेवा और राष्ट्र के आदर्शों के प्रति समर्पण ही सच्ची स्वदेश भक्ति है।
लेखक ने सच्ची स्वदेश भक्ति का जो अर्थ बतलाया है वह हैं

A

परदुखकातरता

B

राष्ट्र निर्माण

C

मानवतावादी दृष्टि

D

बुनियादी विकास

लिखित उत्तर

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परदुखकातरता का अर्थ होता है-दूसरों के दुख से द्रवित होना।
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