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Class 14
HINDI
चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती-भा...

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती
दौड़ती-भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती
जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ,
जहाँ कोई नहीं पहंचा कभी चीटियों से पहले।
संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान
रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर
दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती हैं कभी-कभार वे
मगर हर बार
नये सिरे से टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई।
गन्ध फिर से एकजुट होते हुए।
काव्यांश में 'मगर' का अर्थ है :

A

केवल

B

परन्तु

C

मगरमच्छ

D

घड़ियाल

लिखित उत्तर

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