वर्तमान समय में कम्प्यूटर की शिक्षा के बिना मनुष्य को लगभग अशिक्षित ही माना जाता है, क्योंकि अब दैनिक जीवन में कम्प्यूटर का प्रयोग बढ़ा है। वर्तमान सन्दर्भ में यह आवश्यक है कि शिक्षा द्वारा उत्पादिता बढाने, भारत का आधुनीकरण करने एवं देश के आर्थिक विकास पर जोर दिया जाए। इसके लिए विज्ञान की शिक्षा, कार्यानुभव एवं व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया जाना आवश्यक है। शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है। इसलिए शिक्षा का उपयोग सामाजिक विकास के साधन के रूप में किया जाता है। यह राष्ट्रीय एकता एवं विकास को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाता है। इसके द्वारा सामाजिक कुशलता का विकास होता है। यह समाज को कुशल कार्यकर्ताओं की पूर्ति करता है। यह समाज की सभ्यता एवं संस्कृति का संरक्षण, पोषण एवं उसका प्रसार करता है। यह समाज के लिए योग्य नागरिकों का निर्माण करता है। इस तरह सामाजिक सुधार एव उसकी उन्नति में शिक्षा सहायक होती है। आधुनिक युग में मानव के संसाधन के रूप में विकास में शिक्षा की भूमिका प्रमुख होती है। उचित शिक्षा के अभाव में मनुष्य कार्यकुशल नहीं बन सकता। कार्यकुशलता के बिना,व्यावसायिक एवं आर्थिक सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। इस तरह शिक्षा द्वारा मनुष्य का आर्थिक एवं व्यावसायिक विकास होता है।
व्यावसायिक शिक्षा देश की कई प्रकार की आर्थिक समस्याओं जैसे बेरोजगारी, निर्धनता, आर्थिक असमानता, इत्यादि के समाधान में सहायक साबित होगी। इससे छात्रों को रोजगार पाने की क्षमता बढ़ेगी, कुशल जनशक्ति की माँग और आपूर्ति के बीच असन्तुलन कम होगा और बिना विशेष रुचि अथवा प्रयोजन के उच्चतर अध्ययन जारी रखने वाले छात्रों के लिए एक विकल्प उपलब्ध हो जाएगा। इस तरह व्यावसायिक शिक्षा के कारण देश का तेजी के साथ आर्थिक विकास होगा। व्यावसायिक शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके लिए इन पाठ्यक्रमों एवं उद्योगमेल -धन्धों के बीच तालस्थापित किया जाना चाहिए। ग्रामीण लड़कियाँ जो आयु में स्कूल छोड़ने को विवश होती हैं बहुत कम, उनके लिए गृह विज्ञान या सिलाई, कला और शिल्प, इत्यादि जैसे घरेलू उद्योगों से सम्बन्धित पूर्णकालिक या अंशकालिक पाठ्यक्रमों की व्यवस्था की जानी चाहिए। गाँवों में फलों की खेती, फूलों की खेती, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, जैसी कृषि सम्बन्धी पाठ्यक्रमों की व्यवस्था की जानी चाहिए। स्वास्थ्य, वाणिज्य, प्रशासन, छोटे पैमाने के उद्योगों और सभी सेवाओं में तरहतरह के दूसरे पाठ्यक्रम - विकसित किए जाने चाहिएं,
जो छमहीने से लेकर तीन वर्षों तक के हो सकते है
'संरक्षण' का सन्धि-विच्छेद है