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आज मानव विज्ञान के युग में श्वास ले रहा ...

आज मानव विज्ञान के युग में श्वास ले रहा है। उसका दैनिक जीवन विज्ञान से प्रभावित है और उसने प्राकृतिक साधनों को सुख व समृद्धि के लिए प्रयुक्त करना सीख लिया है। उसने अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु नित नए आविष्कार किए हैं। आज विश्व के कोने-कोने में विज्ञान ने धूम मचा दी है। आविष्कारों ने मानव जीवन को भरपूर कर दिया है। लिखने के लिए सुंदर पैन से लेकर चिकने सफेद कागज तक सभी वस्तुएँ यंत्रों में ढलकर उसकी सेवा में प्रस्तुत हो जाती हैं। बटन दबाते ही कक्ष का गहन अंधकार विद्युत के प्रकाश से जगमगाने लगता है। विश्व में इसने व्यापार, चिकित्सा और यातायात सभी क्षेत्रों में अपना प्रभाव जमा रखा है। आज मानव बिना विज्ञान के जीवन-निर्वाह करने की कल्पना भी नहीं कर सकता है। सच पूछो, तो विज्ञान और मानव जीवन पर्याय बन गए हैं। इसकी कपा से हर क्षेत्र में मानव गति तीन हो गई और उसकी पहुँच दूर तक बढ़ गई है। विज्ञान ने भूखे को रोटी, गरीब को दौलत, नंगे को कपड़ा, बीमार को दवा और स्वास्थ्य, बेकार को रोजगार, अन्धे को आँख, बहरे को कान, लँगड़े को टाँग और जिन्हें जो चाहिए उन्हें मुंहमांगा वरदान दिया है।
'आविष्कार' शब्द का बहुवचन रूप है

A

आविष्कारों

B

खोजों

C

अनेक आविष्कार

D

खोज

लिखित उत्तर

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