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स्थूल एवं बाह्य पदार्थ सूक्ष्म एवं मानसि...

स्थूल एवं बाह्य पदार्थ सूक्ष्म एवं मानसिक पदार्थों एवं भावों की अपेक्षा अधिक आधिपत्य का विषय है। जो मनुष्य भोजन का एक कौर खाता है, वह दूसरे को वह ग्रास खाने से रोकता है, उससे कौर छीनने के लिए भी तैयार हो जाता है, किन्तु जो मनुष्य कविता पाठ का आनन्द लेता है अथवा कविता लिखता है, वह किसी दूसरे को कविता के आनन्द लेने या कविता लिखने में बाधा नहीं डालता। यही कारण है कि स्थूल वस्तुओं के विषय में ऐसे अवसर अथवा परिवेश की आवश्यकता है जो कि उनकी प्राप्त्याशा को यक्तिसंगत बनाता है। जो व्यक्ति सिसृक्षा से आकुल है, रचनात्मक कार्य करने में समर्थ है, उसे भौतिक स्थूल लाभ अथवा प्रलोभन न तो लुब्ध करते हैं और न ही प्रोत्साहिता विश्व में विचारक, दार्शनिक उसमें से ही होते है, उनमें भौतिक महत्वाकांक्षा अत्यल्प होती है। 'पूँजी' का रचयिता कार्ल मार्क्स जीवन भर निर्धनता से जूझता रहा। राज्याधिकारियों ने सुकरात को मरवा डाला, पर वह जीवन के अतिम क्षणों में भी शान्त रहा, क्योंकि वह अपने जीवन के लक्ष्य का भली-भाँति निर्वाह कर चुका था, अपने जीवन का कार्य समाप्त कर चुका था, किन्तु यदि उसे पुरस्कृत किया जाता, प्रतिष्ठा के अम्बारों से लाद दिया जाता, परन्तु उसे अपना काम न करने दिया जाता तो वह अनुभव करता कि उसे कठोर रूप में दण्डित किया गया है।
'अपने जीवन में इस कार्य को समाप्त कर चुका था। इस वाक्य को भविष्यकाल में बदलो

A

अपने जीवन में इस कार्य को समाप्त कर रहा हूँ।

B

अपने जीवन में इस कार्य को समाप्त कर दूंगा।

C

अपने जीवन में इस कार्यों को समाप्त कर लूंगा।

D

उपर्युक्त सभी

लिखित उत्तर

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