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Class 14
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निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए...

निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए
हम नाम के ही आस्तिक हैं। हर बार में ईश्वर के तिरस्कार करके ही हमने आस्तिक की ऊँची उपाधि पाई। ईश्वर का नाम दीनबन्धु है। यदि हम वास्तव में आस्तिक या दीनबन्धु भगवान के भक्त आज बन बैठे हैं दीनबन्धु की ओट में हम तो दीन-दर्बलों का खासा शिकार खेल रहे हैं। कैसे अद्वितीय आस्तिक हैं हम, न जाने क्या समझकर हम अपने कल्पित ईश्वर का नाम दीनबन्धु रखे हुए हैं, क्यों इस नाम से उस लक्ष्मीकान्त का स्मरण करते हैं।
दीननि देख घिनात जे, नहिं दीननि सो काम।
कहा जाति ते लेत हैं, दीनबन्धु को नाम।
यह हमने सुना अवश्य है कि त्रिलोकेश्वर श्री कृष्ण की मित्रता और । प्रीति सुदामा नाम के एक दीन-दर्बल ब्राह्मण से थी। यह भी सुना है कि भगवान यदुराज ने महाराज दुर्योधन का अतुल आतिथ्य अस्वीकार कर : बड़े प्रेम से गरीब विदुर के वहाँ साग-भाजी का भोग लगाया था। पर ये बातें चित्त पर कुछ बैठती नहीं हैं हरे-हरे। वह उन घिनौनी कूटियों में कैसे जाएगा? रत्नजड़ित स्वर्ण- पर विराजने वाला ईश्वर उन भुक्खड़ कंगालों के कटे-फटे कम्बलों पर बैठने जाएगा वह मालपुआ और मोहनभोग आरोगने वाला भगवान उन भिखारियों की रुखी-सूखी रोटी खाने जाएगा? कभी नहीं हो सकता, हम अपने बनाए हुए विशाल राजमन्दिर में उन दुर्बलों को आने भी न देंगे। उन पतितों और अछूतों की छाया तक हम अपने खरीदे हुए खास ईश्वर पर न पड़ने देंगे।
मरीज शब्द है

A

नित्य पुल्लिंग

B

नित्य स्त्रीलिंग

C

स्त्रीलिंग और पुल्लिंग

D

इनमें से कोई नहीं

लिखित उत्तर

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