Home
Class 14
HINDI
चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय ...

चमकीली है सुबह आज की आसमान में
निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी
बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे
घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी।
कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर
आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी,
चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी
कल चंदा की किरण और चटकीली होगी
खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे
आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी।
'कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी' से तात्पर्य है -

A

दुख की अनुभूति खत्म होगी |

B

निराशा दूर होगी ।

C

मन का दुख दूर होगा

D

पुरानी डाल टूट जाएगी

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
B
Promotional Banner

Topper's Solved these Questions

  • हिन्दी NCF-2005 (SHORT NOTES)

    CTET MASTER|Exercise अभ्यास प्रश्न |5 Videos

Similar Questions

Explore conceptually related problems

चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। कवि को विश्वास है कि

चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। 'चाँदनी' का विशेषण है

चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। काव्यांश में 'चमकीली सुबह का आशय है।

चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। 'कुसुम' का पर्यायवाची शब्द नहीं है

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बेचैनी की बाँहों में कल फूल खिलेंगे घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुंठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी कल चंदा की किरण और चटकीली होगी खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे आँखें अपनी आँखों को पहचान सकेंगी। 'दिल के दरवाजे खुल जाएँगे' का क्या अर्थ है ?

कल की बात|उदाहरण|योगफल की सीमा के रूप में निश्चित समाकलन|OMR

कल की बात|उदाहरण|योगफल की सीमा के रूप में निश्चित समाकलन|OMR

कल की बात|उदाहरण|योगफल की सीमा के रूप में निश्चित समाकलन|OMR

कल की बात|उदाहरण|योगफल की सीमा के रूप में निश्चित समाकलन|OMR

CTET MASTER-हिन्दी भाषा और शिक्षाशास्त्र -बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बे...

    Text Solution

    |

  2. चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बे...

    Text Solution

    |

  3. चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बे...

    Text Solution

    |

  4. चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बे...

    Text Solution

    |

  5. निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चय...

    Text Solution

    |

  6. चमकीली है सुबह आज की आसमान में निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी बे...

    Text Solution

    |

  7. विविध प्रांत हैं अपनी-अपनी भाषा के अभिमानी हम, पर इन सबसे पहले दुनिय...

    Text Solution

    |

  8. विविध प्रांत हैं अपनी-अपनी भाषा के अभिमानी हम, पर इन सबसे पहले दुनिय...

    Text Solution

    |

  9. विविध प्रांत हैं अपनी-अपनी भाषा के अभिमानी हम, पर इन सबसे पहले दुनिय...

    Text Solution

    |

  10. विविध प्रांत हैं अपनी-अपनी भाषा के अभिमानी हम, पर इन सबसे पहले दुनिय...

    Text Solution

    |

  11. विविध प्रांत हैं अपनी-अपनी भाषा के अभिमानी हम, पर इन सबसे पहले दुनिय...

    Text Solution

    |

  12. विविध प्रांत हैं अपनी-अपनी भाषा के अभिमानी हम, पर इन सबसे पहले दुनिय...

    Text Solution

    |

  13. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन-नदि...

    Text Solution

    |

  14. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन-नदि...

    Text Solution

    |

  15. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन-नदि...

    Text Solution

    |

  16. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन-नदि...

    Text Solution

    |

  17. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन-नदि...

    Text Solution

    |

  18. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन-नदि...

    Text Solution

    |

  19. स्थूल एवं बाह्य पदार्थ सूक्ष्म एवं मानसिक पदार्थों एवं भावों की अपेक्ष...

    Text Solution

    |

  20. स्थूल एवं बाह्य पदार्थ सूक्ष्म एवं मानसिक पदार्थों एवं भावों की अपेक्ष...

    Text Solution

    |