Home
Class 14
HINDI
लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जि...

लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भारी-भरकम साधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे थोड़े-से स्थान पर, थोड़ी पूँजी और अल्प साधनों से ही आरम्भ किए जा सकते हैं। फिर भी उनसे सुनियोजित ढंग से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करके देश की निर्धनता, गरीबी और विषमताओं से एक सीमा तक लड़ा जा सकता है। अपने आकार-प्रकार तथा साधनों की लघुता व अल्पता के कारण ही इस प्रकार के उद्योग-धंधों को कुटीर उद्योग भी कहा जाता है। इस प्रकार के उद्योग-धंधे अपने घर में भी आरम्भ किए जा सकते हैं और अपने सीमित साधनों का सदुपयोग करके आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है आर सुखी-समृद्ध बना जा सकता है। भारत जैसे देश के लिए तो इस प्रकार के लघु उद्योगों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या बेरोजगार है। इसी कारण महात्मा गांधी ने मशीनीकरण का विरोध किया था। उनकी यह स्पष्ट धारणा थी कि लघु उद्योगों को प्रश्रय देने से लोग स्वावलम्बी बनेंगे, मजदूर किसान फसलों की बुआई कटाई से फुर्सत पाकर अपने खाली समय का ति । सदुपयोग भी करेंगे। इस प्रकार आर्थिक समृद्धि तो बढ़ेगी ही, साथ ही लोगों को अपने घर के पास रोजगार मिल सकेगा।
गद्यांश के अनुसार 'प्रश्रय' शब्द का भाव है

A

अनुमोदन करना

B

स्वीकृति देना

C

संरक्षण देना

D

नियुक्ति करना

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
C
Promotional Banner

Topper's Solved these Questions

  • हिन्दी NCF-2005 (SHORT NOTES)

    CTET MASTER|Exercise अभ्यास प्रश्न |5 Videos
CTET MASTER-हिन्दी भाषा और शिक्षाशास्त्र -बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भ...

    Text Solution

    |

  2. लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भ...

    Text Solution

    |

  3. लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारम्भ एवं आयोजन के लिए भ...

    Text Solution

    |

  4. बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप...

    Text Solution

    |

  5. बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप...

    Text Solution

    |

  6. बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप...

    Text Solution

    |

  7. बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप...

    Text Solution

    |

  8. बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप...

    Text Solution

    |

  9. बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप...

    Text Solution

    |

  10. बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में न जैसे-जैसे धान रोप...

    Text Solution

    |

  11. शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, म...

    Text Solution

    |

  12. शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, म...

    Text Solution

    |

  13. शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, म...

    Text Solution

    |

  14. शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, म...

    Text Solution

    |

  15. शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, म...

    Text Solution

    |

  16. शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, म...

    Text Solution

    |

  17. शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, म...

    Text Solution

    |

  18. राष्ट्रीय पर्वो और सांस्कृतिक समारोहों के दौरान गीत गाए जाएँ। कविताएँ ...

    Text Solution

    |

  19. राष्ट्रीय पर्वो और सांस्कृतिक समारोहों के दौरान गीत गाए जाएँ। कविताएँ ...

    Text Solution

    |

  20. राष्ट्रीय पर्वो और सांस्कृतिक समारोहों के दौरान गीत गाए जाएँ। कविताएँ ...

    Text Solution

    |