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राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें...

राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखे, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देशात प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी को कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्यास-से-हम बच ही नहीं है सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी , के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है।
''लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते है.....' वाक्य में रेखांकित शब्द किस अर्थ की ओर संकेत करता है?

A

आनंद

B

अखंड

C

असीम

D

अनंत

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The correct Answer is:
B
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  • हिन्दी NCF-2005 (SHORT NOTES)

    CTET MASTER|Exercise अभ्यास प्रश्न |5 Videos
CTET MASTER-हिन्दी भाषा और शिक्षाशास्त्र -बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अ...

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  2. राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अ...

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  3. राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अ...

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  4. राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अ...

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  5. राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अ...

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  6. राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अ...

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  7. राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अ...

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  8. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  9. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  10. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  11. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  12. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  13. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  14. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  15. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  16. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  17. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  18. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  19. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  20. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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