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यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थ...

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की संभावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परंतु वार्तालाप हम भूलते नहीं है। सुनने के लिए पुराना भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है जिससे वह-सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को 'भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते हैं। दो कान इसलिए हैं कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें मुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है।
सुनने की कला आज दुर्लभ होती जा रही है। शोध बताते हैं कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र बीस प्रतिशत ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल दस प्रतिशत ही याद रहा है। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है।
लेखक के अनुसार क्या महत्वपूर्ण है?

A

सुनना

B

ध्यान से सुनना

C

ध्यान से सुनकर सारतत्त्व ग्रहण करना

D

सुनकर याद रखना

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The correct Answer is:
C
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CTET MASTER-हिन्दी भाषा और शिक्षाशास्त्र -बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  2. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  3. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  4. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  5. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  6. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  7. यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो ब...

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  8. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  11. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  16. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

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