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जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही ...

जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह । क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार को इस स्वीकृति को मनुष्यों ही का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया । गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप न नहीं कर.सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने । के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है।
'अंधकार का निषेध' किस ओर संकेत करता है?

A

अन्याय, शोषण, बुराइयों को सदा के लिए समाप्त करना

B

समाज में फैले अंधकार को प्रकाश में बदल देना

C

समाज को अंधकार से मुक्त कराने के लिए प्रयत्नशील रहना

D

यह मानना कि समाज में अन्याय, शोषण, बुराइयाँ नहीं हैं

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The correct Answer is:
A
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  • हिन्दी NCF-2005 (SHORT NOTES)

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CTET MASTER-हिन्दी भाषा और शिक्षाशास्त्र -बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  2. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  3. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  4. जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लो...

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  9. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

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  10. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

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  11. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

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