Home
Class 14
HINDI
समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ...

समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में ऊँचे उद्देश्य नहीं होते, उनमें लोक-संग्रह नहीं होता, भव्य आदर्श नहीं होते। दूसरे, भले ही आपके सामने एक ऊंचा आदर्श रखें, तो भी आपके कर्म यदि आपके मन के चाहे या अनचाहे से प्रेरित हैं तो वे ह्रासमान ही होंगे, क्योंकि पसंद-नापसंद से किए जाते कार्य वासनाओं को बढ़ाए बिना नहीं रहते। कोई काम आपको महज इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह आपको पसंद है। उसी तरह कोई काम करने से आपको महज इस आधार पर नहीं कतराना चाहिए कि वह काम आपका मनचाहा नहीं है। कार्य का निर्णय बुद्धि-विवेक के आधार पर होना चाहिए, 'मनचली भावनाओं, तुनकमिजाजी के आधार पर कतई नहीं। इस एक बात को हमेशा याद रखिए कि पसंद और नापसंद आपके सबसे बड़े शत्र हैं। शm इन्हें पहचानते तक नहीं। उल्टे आप इन्हें पाल-पोसकर दुलारते हैं। वे तो हर क्षण आपकी हानि व ह्रास करने पर ही तुले हैं। इनसे निबटने का व्यावहारिक मार्ग यह है कि अपनी रुचि और अरुचि का विश्लेषण करें।
इस गद्यांश में किस प्रकार के कार्यों का समर्थन किया गया है?

A

जो मनचाहे नहीं होते हैं

B

जो मनचाहे नहीं होते हैं

C

जो बुद्धि और विवेक-शक्ति के आधार पर किए जाते हैं

D

जो मनचली भावनाओं और बुद्धि से परे होते हैं ।

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
D
Promotional Banner

Topper's Solved these Questions

  • हिन्दी NCF-2005 (SHORT NOTES)

    CTET MASTER|Exercise अभ्यास प्रश्न |5 Videos
CTET MASTER-हिन्दी भाषा और शिक्षाशास्त्र -बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  2. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  3. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  4. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  5. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  6. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  7. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  8. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  9. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  10. समूची स्वार्थी व अह-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में...

    Text Solution

    |

  11. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  12. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  13. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  14. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  15. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  16. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  17. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  18. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  19. मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति । तभी हो...

    Text Solution

    |

  20. सुप्रसिद्ध गीतकार गोपालदास 'नीरज' ने अपनी एक रचना में कहा है। जैसा हो ...

    Text Solution

    |