Home
Class 14
HINDI
सेवासदन' के उपरान्त सन् 1920 में प्रेमचन...

सेवासदन' के उपरान्त सन् 1920 में प्रेमचन्द का उपन्यास 'वरदान' प्रकाशित हुआ, किन्तु यह उपन्यास न तो सेवासदन की 'भाव-भंगिमा' को स्पर्श कर । 'सका, इसमें न वह उष्णता थी और न ही वैचारिक स्पष्टता। ऐसा लगता ही नहीं कि 'सेवासदन' लिखने के बाद प्रेमचन्द ने इस उपन्यास का सृजन किया है, जो वैचारिक प्रौढ़ता सेवासदन में है उसका अल्पांश भी वरदान में नहीं है। उपन्यास की अधिकांश कथा में क्रमश: कृत्रिमता बढ़ती ही चली गई। है और कल्पना की अतिशयता ने मूल कथानक को ही अस्त-व्यस्त कर दिया है। निःसन्देह 'वरदान' प्रेमचन्द की एक दुर्बल कृति है। वरदान के प्रकाशन के ठीक एक वर्ष बाद सन् 1921 में प्रेमचन्द का 'प्रेमाश्रम' प्रकाश में आया। 'प्रेमाश्रम' में प्राय: उन सभी दोषों का अभाव है, जिनके कारण वरदान एक अशक्त उपन्यास बनकर रह गया था। इस उपन्यास के माध्यम से जमींदार और कृषकों का संघर्ष पहली बार भारतीय समाज के सामने इतना खुलकर और उभर कर स्पष्ट रूप में आया तथा प्रेमचन्द की कला भी सम्भवतः पहली बार प्रौढ़तर रूप में प्रकट हुई। श्री इलाचन्द्र की कला भी सम्भवतः पहली बार प्रौढ़तर रूप में प्रकट हुई। श्री इलाचन्द्र जोशी एवं श्री अवध उपाध्याय जैसे प्रेमचन्द के प्रारम्भिक आलोचकों ने इस उपन्यास की यद्यपि तीखी आलोचना की है, किन्तु आलोचकों की आलोचना से तो कोई कृति अपनी 'महानता खो नहीं देती, जो सामाजिक सच था, प्रेमचन्द ने उसकी अभिव्यक्ति दी है और सच की आलोचना करने पर भी सच, सच ही रहता है।
इस उपन्यास का कथा क्षेत्र प्रेमचन्द्र के अब तक प्रकाशित उपन्यासों में सर्वाधिक विस्तृत था। भिन्न-भिन्न जीवन पक्षों का अत्यधिक सूक्ष्म चित्रण प्रेमचन्द ने इस उपन्यास में प्रस्तुत किया। इस रचना में उपन्यासकार ने शोषक एवं शोषित के जिस संघर्ष को चित्रित किया है वह अत्यन्त सजीव एवं रोमांचक है। लेखक ने इसमें कहीं-कहीं पर बड़े संयत दृष्टिकोण से ग्राम्य । जीवन की विडम्बनाओं का चित्रण किया है। भारतीय ग्रामीण समाज की चिन्ताजनक स्थिति की पृष्ठभूमि में उपन्यास में लेखक ने विशेष रूप से ग्राम्य जीवन की समस्याओं पर ही विचार किया है। किसानों की दयनीय स्थिति का चित्रण और जमींदारों का वर्णन करते हुए लेखक ने ग्राम-सुधार के लिए उपायों पर विचार किया है और यह कहना असंगत न होगा कि इसके लिए लेखक को गाँधीवादी आदर्शवाद का आश्रय लेना पड़ा है। सभी शोषकों का अन्ततः हृदय परिवर्तन कराया जाता है, किन्तु यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि इस उपन्यास में प्रेमचन्द जी की आदर्शवादिता एक अपेक्षाकृत व्यावहारिक व विश्वसनीय मोड़ लेती है। लेखक की सहानुभूति कृषकों के साथ होते हुए भी व्यापक है, अतः वे अपराधी एवं अन्यायी को अधिकाधिक निन्दित, उपहासित व दण्डित करके उसका सुधार एवं परिष्कार करते हैं।
प्रेमाश्रम में उद्देश्य ही उसका सर्वस्व है और यदि कथावस्तु संगठन पर लेखक ने तनिक भी और ध्यान रखा होता, तो नि:सन्देह यह कृति 'गोदान' से कम महत्त्वपूर्ण नहीं होती। यद्यपि आज भी कल्पित आलोचक 'प्रेमाश्रम' को गोदान से श्रेष्ठ मानते हैं।
'अभिव्यक्ति' में उपसर्ग है

A

क्ति

B

यक्ति

C

अभि

D

अभिव

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
C
Promotional Banner

Topper's Solved these Questions

  • अपठित गद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस गद्यांश (विगत वर्षो में पूछे गए प्रश्न )|150 Videos
  • अपठित गद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise उदाहरण|15 Videos
  • अपठित काव्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise अभ्यास प्रश्न |36 Videos
  • अपठित पद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस पद्यांश(विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न)|60 Videos
BHARDWAJ ACADEMY-अपठित गद्यांश -प्रैक्टिस गद्यांश
  1. सेवासदन' के उपरान्त सन् 1920 में प्रेमचन्द का उपन्यास 'वरदान' प्रकाशित...

    Text Solution

    |

  2. आदर्शवादिता शब्द है

    Text Solution

    |

  3. सेवासदन' के उपरान्त सन् 1920 में प्रेमचन्द का उपन्यास 'वरदान' प्रकाशित...

    Text Solution

    |

  4. गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भार...

    Text Solution

    |

  5. गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भार...

    Text Solution

    |

  6. गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भार...

    Text Solution

    |

  7. गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भार...

    Text Solution

    |

  8. गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भार...

    Text Solution

    |

  9. गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भार...

    Text Solution

    |

  10. गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भार...

    Text Solution

    |

  11. गोदान' प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भार...

    Text Solution

    |

  12. गोदान' प्रेमचन्द जी का एक ऐसा क्रान्तिकारी उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन...

    Text Solution

    |

  13. गोदान' प्रेमचन्द जी का एक ऐसा क्रान्तिकारी उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन...

    Text Solution

    |

  14. गोदान' प्रेमचन्द जी का एक ऐसा क्रान्तिकारी उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन...

    Text Solution

    |

  15. गोदान' प्रेमचन्द जी का एक ऐसा क्रान्तिकारी उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन...

    Text Solution

    |

  16. गोदान' प्रेमचन्द जी का एक ऐसा क्रान्तिकारी उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन...

    Text Solution

    |

  17. गोदान' प्रेमचन्द जी का एक ऐसा क्रान्तिकारी उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन...

    Text Solution

    |

  18. गोदान' प्रेमचन्द जी का एक ऐसा क्रान्तिकारी उपन्यास है, जिसमें तत्कालीन...

    Text Solution

    |

  19. भारतीय साहित्य भारतीय संस्कृति के आधार पर विकसित हुआ है। इस संस्कृति म...

    Text Solution

    |

  20. भारतीय साहित्य भारतीय संस्कृति के आधार पर विकसित हुआ है। इस संस्कृति म...

    Text Solution

    |