Home
Class 14
HINDI
गाँधीजी ने माना कि अहिंसा ईश्वर की कल्पन...

गाँधीजी ने माना कि अहिंसा ईश्वर की कल्पना की तरह अनिर्वचनीय एवं अगोचर है, पर जीवन में इसके आभास होते रहते हैं। वर्ष 1940 में कलकत्ता के समीप मलिकन्दा में अपने शीर्षस्थ साथियों की सभा में गाँधीजी ने कहा था, "अहिंसा अगर व्यक्तिगत गुण है, तो यह मेरे लिए त्याज्य है। मेरी अहिंसा की कल्पना व्यापक है मैं तो उसका सेवक हूँ, जो चीज करोड़ों की नहीं हो सकती, वह मेरे लिए त्याज्य है और मेरे साथियों के लिए भी त्याज्य होनी चाहिए। हम तो यह सिद्ध करने के लिए पैदा हुए हैं कि सत्य और अहिंसा केवल व्यक्तिगत आधार के नियम नहीं हैं। यह समुदाय, जाति और राष्ट्र की नीति हो सकती है।" उन्होंने आगे कहा, "मैंने इसी को अपना कर्तव्य माना है। चाहे सारा जगत् मुझे छोड़ दे, तो भी मैं इसे नहीं छोडूंगा। इसे सिद्ध करने के लिए ही मैं जीऊँगा और उसी प्रयल में मैं मरूँगा।"
वास्तव में, महानायक बनने में उनके जिस विचार ने सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई वह उनका अहिंसा का ही विचार था। इसलिए देश की आजादी को अति महत्त्वपूर्ण लक्ष्य मानते हुए भी वह उसे अहिंसा को त्यागकर प्राप्त करना नहीं चाहते थे। अंग्रेजों से लड़ने के लिए हिंसा के बदले अहिंसा को हथियार बनाने का कारण भी यही था।
महात्मा गाँधी के दक्षिण अफ्रीका प्रवास पर यदि हम एक विहंगम दृष्टि डालें, तो स्पष्ट होगा कि एक साधारण से व्यक्ति के रूप में पहुंचे गाँधीजी ने 22 वर्ष की लम्बी लड़ाई में अपमान, भूख, मानसिक सन्ताप व शारीरिक यातनाएँ झेलते हुए न केवल राजनीतिक, बल्कि सामाजिक व नैतिक क्षेत्र में जो उपलब्धियाँ प्राप्त की, उसकी मिसाल अन्यत्र मिलना असम्भव है। उनके भारत लौटने पर गुरुदेव टैगोर ने कहा था-"भिखारी के लिबास में एक महान् आत्मा लौटकर आई है।" सन् 1919 से लेकर 1948 में अपनी मृत्यु तक भारत के स्वाधीनता आन्दोलन के महान् ऐतिहासिक नाटक में गाँधीजी की भूमिका मुख्य अभिनेता की रही। उनका जीवन उनके शब्दों से भी बड़ा था। उनका आचरण विचारों से महान् था और उनकी जीवन प्रक्रिया तर्क से अधिक सृजनात्मक थी।
'सृजनात्मक' शब्द है

A

क्रिया

B

संज्ञा

C

विशेषण

D

क्रिया-विशेषण

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
C
Promotional Banner

Topper's Solved these Questions

  • अपठित गद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस गद्यांश (विगत वर्षो में पूछे गए प्रश्न )|150 Videos
  • अपठित गद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise उदाहरण|15 Videos
  • अपठित काव्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise अभ्यास प्रश्न |36 Videos
  • अपठित पद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस पद्यांश(विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न)|60 Videos
BHARDWAJ ACADEMY-अपठित गद्यांश -प्रैक्टिस गद्यांश
  1. गाँधीजी ने माना कि अहिंसा ईश्वर की कल्पना की तरह अनिर्वचनीय एवं अगोचर ...

    Text Solution

    |

  2. गाँधीजी ने माना कि अहिंसा ईश्वर की कल्पना की तरह अनिर्वचनीय एवं अगोचर ...

    Text Solution

    |

  3. गाँधीजी ने माना कि अहिंसा ईश्वर की कल्पना की तरह अनिर्वचनीय एवं अगोचर ...

    Text Solution

    |

  4. गाँधीजी ने माना कि अहिंसा ईश्वर की कल्पना की तरह अनिर्वचनीय एवं अगोचर ...

    Text Solution

    |

  5. पर्यावरण प्रदूषण आज विश्वव्यापी समस्या है। वर्तमान एवं आने वाले दशकों ...

    Text Solution

    |

  6. पर्यावरण प्रदूषण आज विश्वव्यापी समस्या है। वर्तमान एवं आने वाले दशकों ...

    Text Solution

    |

  7. पर्यावरण प्रदूषण आज विश्वव्यापी समस्या है। वर्तमान एवं आने वाले दशकों ...

    Text Solution

    |

  8. पर्यावरण प्रदूषण आज विश्वव्यापी समस्या है। वर्तमान एवं आने वाले दशकों ...

    Text Solution

    |

  9. पर्यावरण प्रदूषण आज विश्वव्यापी समस्या है। वर्तमान एवं आने वाले दशकों ...

    Text Solution

    |

  10. पर्यावरण प्रदूषण आज विश्वव्यापी समस्या है। वर्तमान एवं आने वाले दशकों ...

    Text Solution

    |

  11. पर्यावरण प्रदूषण आज विश्वव्यापी समस्या है। वर्तमान एवं आने वाले दशकों ...

    Text Solution

    |

  12. आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भ...

    Text Solution

    |

  13. आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भ...

    Text Solution

    |

  14. आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भ...

    Text Solution

    |

  15. आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भ...

    Text Solution

    |

  16. आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भ...

    Text Solution

    |

  17. आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भ...

    Text Solution

    |

  18. आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भ...

    Text Solution

    |

  19. आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भ...

    Text Solution

    |

  20. विद्यालय समाज की एक ऐसी संस्था है, जिसके कुछ सुनिश्चित एवं सुनिर्धारित...

    Text Solution

    |