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जिन्होंने भी बच्चों को पढ़ाने की कोशिश क...

जिन्होंने भी बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की है-चाहे वे माता-पिता हों या शिक्षक उनके खाते में सफलता के साथ-साथ असफलता और निराशा भी दर्ज होती है। ऐसे में एक सवाल उठता है कि आखिर इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना ?
एक मुख्य समस्या तो यह है कि पढ़ाने वालों का विश्वास बच्चों की क्षमताओं या योग्यताओं पर काफी कम होता है। यह बात मैं यूँ ही नहीं कर रही बल्कि एक अभिभावक, एक शिक्षक और एक शिक्षक प्रशिक्षक होने के आधार पर कह रही हूँ
कई बार मैं उस पाठ को लेकर बच्चों (दूसरी, तीसरी या फिर पाँचवीं) के सामने खड़ी होती हूँ जो मुझे उन्हें पढ़ाना है। मेरे पास कुछ जानकारी है जो मैं बच्चों को देना चाहती हूँ। लेकिन मैं यह जानकरी उन्हें क्यूँ देना चाहती हूँ? क्योंक मुझे लगता है कि वे इसके बारे में नहीं जानते, इसे जानने में उन्हें मजा आएगा, यह दुनिया के बारे में उनके नजरिए को विस्तृत करने में मदद करेगी, यह उन्हें बेहतर इन्सान बनने में मदद करेगी, भले ही थोड़ा-सा।
लेकिन कभी-कभार पढ़ाना शुरू करने से पहले ही मेरे दिमाग में यह ख्याल बुदबुदाना शुरू कर देता है कि शायद उन्हें वह पहले से ही मालूम हो जो मैं उन्हें बताना चाहती हूँ, तो उन्हें कुछ बताने की बजाय मैं उनके सामने सवाल रख देती हूँ।
बच्चों को पढ़ाने से पहले स्वयं से 'क्यों' वाला सवाल पूछना क्यों जरूरी है?

A

ताकि हम बच्चों से भी "क्यों' याले सवाल पूछ सकें

B

यह पढ़ाने के उद्देश्य और तरीके निर्धारित करने में मदद करता है

C

इससे पाठ्यक्रम जल्दी खत्म हो जाता है

D

इससे न पढ़ाने के लिए तार्किक आधार मिल जाता है

Text Solution

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The correct Answer is:
B
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