Home
Class 14
HINDI
हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों...

हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब मैं उनसे कहता था-'साहित्य की हर विधा को, हर तरह की लेखनी को मैं बतौर चुनौती स्वीकार करता हूँ। आम आदमी से लेकर खास आदमी तक के हृदय को छूना कोई मामूली बात नहीं होती। यह तो आप भी स्वीकार करेंगे, क्योंकि यह काम सिर्फ रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ ही कर पाते है। मेरी यह दलील रामबाण सिद्ध होती थी, वे सारे मित्र सोच में पड़ जाते थे, क्योंकि वे केवल किसी भी एक वर्ग के लिए लिख पाते थे- 'मास' के लिए या 'क्लास' के लिए। उनके दायरे सीमित थे लेकिन मैं दायरों के बाहर का शख्स हूँ। शायद इसी कारण मैं आपसे खुलकर अन्तरंग बातें भी कर सकता हूँ। बात कहानी की रचना-प्रक्रिया से आरम्भ की थी। तब मैं 'ओ. हेनरी' की एक कहानी पढ़ता था और भीतर दो नई कहानियों के बीज अपने आप पड़ जाते थे। न कोई मशक्कत, न कोई गहरी सोचा यह प्रोसेस मेरे लिए उतना ही आसान था जितना कि कैरम का खेल। फिर भी ये रचनाएँ कहानी के शिल्प में कहानी विधा के अन्तर्गत लिखी गई पुख्ता किस्सागोई हैं। पर यह किस्सागोई जिन्दगी से अलग नहीं हो सकती।
'दलील का हलक से नहीं उतरने' का आशय है

A

दलील को स्वीकार न कर पाना

B

दलील को दूसरों को ना बताना

C

दलील को हल्के से न लेना

D

दलील के विपरीत दूसरी दलील रखना

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
A
Promotional Banner

Topper's Solved these Questions

  • अपठित गद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस गद्यांश |150 Videos
  • अपठित काव्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise अभ्यास प्रश्न |36 Videos
  • अपठित पद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस पद्यांश(विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न)|60 Videos
BHARDWAJ ACADEMY-अपठित गद्यांश -प्रैक्टिस गद्यांश (विगत वर्षो में पूछे गए प्रश्न )
  1. मनुष्य अपने विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करके अपनी विविध आव...

    Text Solution

    |

  2. हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब म...

    Text Solution

    |

  3. हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब म...

    Text Solution

    |

  4. हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब म...

    Text Solution

    |

  5. हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब म...

    Text Solution

    |

  6. हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब म...

    Text Solution

    |

  7. हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब म...

    Text Solution

    |

  8. हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब म...

    Text Solution

    |

  9. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदि...

    Text Solution

    |

  10. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदि...

    Text Solution

    |

  11. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदि...

    Text Solution

    |

  12. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदि...

    Text Solution

    |

  13. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदि...

    Text Solution

    |

  14. हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदि...

    Text Solution

    |

  15. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  16. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  17. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  18. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  19. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  20. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |