Home
Class 14
HINDI
स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनक...

स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत था। उनके सारे चिन्तन का केन्द्र बिन्दु राष्ट्र था। अपने राष्ट्र की प्रगति एवं उत्थान के लिए जितना चिन्तन एवं कर्म इस तेजस्वी संन्यासी ने किया उतना पूर्ण समर्पित राजनीतिज्ञों ने भी सम्भवतः नहीं किया। अन्तर यह है कि इन्होंने सीधे राजनीतिक धारा में भाग नहीं लिया किन्तु इनके कर्म एवं चिन्तन की प्रेरणा से हजारों ऐसे कार्यकर्ता तैयार हुए जिन्होंने राष्ट्र-रथ को आगे बढ़ाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इन्होंने निजी मुक्ति को जीवन का लक्ष्य नहीं बनाया था बल्कि करोड़ों देशवासियों के उत्थान को ही अपना जीवन-लक्ष्य बनाया। राष्ट्र के दीन-हीन जनों की सेवा को ही वे ईश्वर की सच्ची पूजा मानते थे। सत्य की अनवरत खोज उन्हें दक्षिणेश्वर के सन्त श्री रामकृष्ण परमहंस तक ले गई और परमहंस ही वह सच्चे गुरु सिद्ध हुए जिनका सान्निध्य पाकर इनकी ज्ञान-पिपासा शान्त हुई। 39 वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी जी जो कार्य कर गए, वे आने वाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। 30 वर्ष की आयु में इन्होंने शिकागो, अमेरिका के विश्व धर्म-सम्मेलन में हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और इसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई। तीन वर्ष तक वे अमेरिका में रहे और वहाँ के लोगों को भारतीय तत्त्व-ज्ञानकी अद्भुत ज्योति प्रदान की। “अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा" यह स्वामी जी का दृढ़ विश्वास था। वे केवल सन्त ही नहीं, एक महान् देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे। अमेरिका से लौटकर उन्होंने आजादी की लड़ाई में योगदान देने के लिए देशवासियों का आह्वान किया और जनता ने स्वामी जी की पुकार का उत्तर दिया। गाँधी जी को आजादी की लड़ाई में जो जन-समर्थन मिला था, वह स्वामी जी के आह्वान का ही फल था। 19वीं सदी के आखिरी दौर में वे लगभग सशक्त क्रान्ति के जरिए भी देश को आजाद कराना चाहते थे परन्तु उन्हें जल्द ही यह विश्वास हो गया था कि परिस्थितियाँ उन इरादों के लिए अभी परिपक्व नहीं हैं। इसके बाद ही उन्होंने. एक परिव्राजक के रूप में भारत और दुनिया को खंगाल डाला। स्वामी जी इस बात से आश्वस्त थे कि धरती की गोद में यदि कोई ऐसा देश है जिसने मनुष्य की हर तरह की बेहतरी के लिए ईमानदार कोशिशें की हैं, तो वह भारत ही है। उनकी दृष्टि में हिन्दू धर्म के सर्वश्रेष्ठ चिन्तकों के विचारों का निचोड़ पूरी दुनिया के लिए अब भी आश्चर्य का विषय है। स्वामी जी ने संकेत दिया था कि विदेशों में भौतिक समृद्धि तो है और उसकी भारत को जरूरत भी है लेकिन हमें याचक नहीं बनना चाहिए। हमारे पास उससे ज्यादा बहुत कुछ है जो हम पश्चिम को दे सकते हैं और पश्चिम को उसकी बेसाख्ता जरूरत है।
मनुष्य की बढ़ोत्तरी के लिए ईमानदार कोशिश की है। वाक्य में रेखांकित किए गए विशेषण का उपभेद बताइए।

A

अवस्थाबोधक

B

गुणबोधक

C

स्थितियोधक

D

दशाबोधक

Text Solution

Verified by Experts

The correct Answer is:
B
Promotional Banner

Topper's Solved these Questions

  • अपठित गद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस गद्यांश |150 Videos
  • अपठित काव्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise अभ्यास प्रश्न |36 Videos
  • अपठित पद्यांश

    BHARDWAJ ACADEMY|Exercise प्रैक्टिस पद्यांश(विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न)|60 Videos
BHARDWAJ ACADEMY-अपठित गद्यांश -प्रैक्टिस गद्यांश (विगत वर्षो में पूछे गए प्रश्न )
  1. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  2. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  3. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  4. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  5. स्वामी विवेकानन्द जी एक ऐसे सन्त थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प...

    Text Solution

    |

  6. निम्नलिखित में से कौन-सा 'देशज' शब्द है?

    Text Solution

    |

  7. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  8. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  9. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  10. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  11. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  12. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  13. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  14. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  15. आदमी की तलाश', यह स्वर अकसर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है...

    Text Solution

    |

  16. अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व...

    Text Solution

    |

  17. अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व...

    Text Solution

    |

  18. अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व...

    Text Solution

    |

  19. अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व...

    Text Solution

    |

  20. अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व...

    Text Solution

    |