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Class 14
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यांत्रिक गति से जाते और लौटते पंडित जी आ...

यांत्रिक गति से जाते और लौटते पंडित जी आज सुबह अचानक उस मैदान की ओर बढ़ चले, जहाँ कथा-भवनों से कलकल ध्वनि के साथ बालकों की धारा निकलकर बह रही थी। उन्हें समझने में देर न लगी कि स्कूली बच्चों की प्रार्थना का समय है । बालक अब पंक्तिबद्ध खड़े हो गये है। कलकल ध्वनि शांत हो गई। किसी आन्तरिक अनुशासन से सबके मुँह पर शांति और नम्रता की सात्विक आता छा गई। सिर किचित आगे झुक गये। आँखे मुंदी अथवा अधमुंदी स्थितियों में हो गई।
पंडित जी ने सोचा, कौन कहता है कि आज का छात्रवर्ग विद्या-बुद्धि के साथ अनुशासन की दिशा में एकदम खोखला हो गया है? ऐसा सोचने वाले एक बार आकर उन्हें इस रूप में देखे । उच्च दर्जे के छात्र भी छोटे बालकों के साथ शांत और संयमित हैं। क्या कभी मार-पीटकर छात्रों को इतना शांत बनाया जा सकता है? नहीं, यह . प्रार्थना और ईश्वर की महिमा का प्रभाव है। भारतवर्ष में शिक्षा को भगवान और उसकी प्रार्थना से काट दिया जाएगा, तो वह खोखली हो जायेगी। प्रार्थना सभा की यह भावमग्नता यदि कक्षा-भवन में नहीं रह सकती तो शिक्षा की सफलता संदिग्ध होगी।
"कक्षा-भवन" में कौनसा समास है?

A

अव्ययी भाव

B

तत्पुरुष

C

बहुब्रीहि

D

द्वन्द्व

लिखित उत्तर

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