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बच्चों की शिक्षा, संस्कारों और सही लालन-...

बच्चों की शिक्षा, संस्कारों और सही लालन-पालन से सरोकार रखने वालों को यह जान लोना चाहिए कि कुछ बच्चों में प्रकृति प्रदत्त सजनात्मक क्षमताएं भी होती हैं और यदि उन्हें उनके आसपास की दुनिया की पहली जानकारी उसे शब्दों के जरिए कराई जाएगी,जो उनके मां के दूध के साथ नहीं मिले हैं तो उनकी सृजनात्मक प्रवृत्ति के साथ खिलवाड होगा। बहुत से घरों में बुक को किताब या पुस्तक कहने पर पाबंदी है। यह प्रवृत्ति बड़े शहरों से फैलती हुई अब छोटे शहरों तक पहुंच रही है और समझा यह जा रहा है कि बच्चों को चीजों के अंग्रेजी नाम सिखाना अथवा आधुनिकता का द्योतक तो है ही साथ ही उन्हें जीवन संघर्ष के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका भी है। अफसोस की बात तो यह है कि स्कूलों की प्रवेश प्रतियोगिताओं में भी इसी को बच्चों की प्रतिभा का मापदण्ड माना जाता है और अभिभावक भी ऐसे स्कूलों को ही अच्छा समझते हैं।
'सृजनात्मक क्षमता का भाव है

A

याद कर लेने की शक्ति

B

रचना करने की सामर्थ्य

C

जन-जन से सम्पर्क

D

घुलमिल जाने की प्रवृत्ति

लिखित उत्तर

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