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अपठित गधान्श : निम्नलिखित गढ़ाण्श के आधा...

अपठित गधान्श : निम्नलिखित गढ़ाण्श के आधार पर प्रश्न का उत्तर दीजिए :
"मानव के पास समस्त जगत को देखने-परखने के डॉ नजरिए हैं एक आशावादी, दूसरा निराशावादी | इसे सकारात्मक और नकारात्मक दृष्टि भी कहते हैं। जो आशावादी या सकारात्मक मार्ग पर चलते हैं, वे सदैव आनन्द की अनुभूति प्राप्त करते हैं तथा निराशावादी या नकारात्मक दृष्टि वाले दुःख के सागर में डूबे रहते हैं और सदा अपने आपको प्रस्थापित करने के लिए तर्क किया करते हैं। वे भूल जाते हैं कि तर्क और कुर्तक से ज्ञान का नाश होता है एवं जीवन में विकृति उत्पन्न होती है । आशावादी तर्क नहीं करता, फलस्वरूप वह आंतरिक आनन्द कि प्रतीति करता है | वह मानता है कि आत्मिक आनंद कभी प्रहार या काटने की प्रक्रिया में नहीं है। इसीलिए जगत में सदा आशावाद ही पनपा है, उसने ही महान व्यक्तियों का सृजन किया है। निराशावाद या नकारामत्क्ता की नींव पर कभी किसी जीवन प्रासाद का निर्माण नहीं हुआ।
निम्न में क्रिया शब्द है :

A

आपको

B

आंतरिक

C

करता

D

जगत

लिखित उत्तर

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