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भारत अब प्रौढावस्था में आ पहुंचा है। भीष...

भारत अब प्रौढावस्था में आ पहुंचा है। भीषण घात-प्रतिघात से साक्षात्कार करते हुए भी उसने बहुमुखी विकास किया है, इसमें संदेह नहीं । लेकिन उसका एक प्रकोष्ठ अंधकार में अभी भी डूबा हुआ है- हृदय, जो कि मानवीय क्रिया व्यापार का नियन्ता है । इस समय वह स्वार्थपरता और भोगवाद के ऐसे रोग से ग्रसित हो गया है जिसके कारण मानवीय आचरण भी बनैला हो गया है । क्षेत्रवाद, जातिवाद, भाषावाद, सम्प्रदायवाद - प्रभति विभिषिकाएँ जो आजादी के साथ उपहार में मिली थीं, आए दिन कहीं-न-कहीं अपनी लोमहर्षक लीला सम्पन्न करती रहती हैं । परिणामस्वरूप शिथिल पड़ते अनुशासन के बन्धन, विखण्डित होती श्रद्धा और कलंकित होता विश्वास, मानवता के लिए कॉटों की सेज बन प्रस्तुत हो रहे हैं । फिर भी 21वीं सदी में प्रवेश की अधीरता हमें सर्वाधिक रही है । कतिपय लोल कपोलों की कृत्रिम रंगीनियाँ समूचे देशवासियों का पर्याय मान लेना उचित नहीं । अत: कल्पना के भव्य महलों के ध्वंसावशेषों पर यथार्थ की झोपड़ियों का निर्माण ही उचित होगा।
वह शब्द बताइए जिसमें संधि तथा प्रत्यय दोनों का प्रयोग हुआ है।

A

रंगीनियाँ

B

ध्वंसावशेषों

C

अधीरता

D

संप्रदायवाद

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
B
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