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गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वा...

गांधीजी सत्य और अहिंसा को जीवन में सर्वाधिक महत्व देते थे, सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन द्वारा उन्होंने अंग्रेजो का मुकाबला किया। गांधीजी सब मनुष्यो को समान मानते थे। धर्म, जाति, सम्प्रदाय, रंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को वे मानवता का कलंक मानते थे।
वे आर्थिक असमानता को भी मिटा डालना चाहते थे। वे वर्गविहीन, जातिविहीन समाज में विश्वास रखते थे। सामाजिक न्याय, शारीरिक श्रम को महत्व देते थे। गांधीजी प्रजातन्त्रिक राज्य को कल्याणकारी मानते थे। गांधीजी के अनुसार नैतिक आचरण का जीवन में विशेष स्थान होना चाहिए। सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, अपरिग्रह, निस्वार्थ सेवा को मानवता के लिए सच्ची सेवा मानते थे। उनके राष्ट्रिय तथा अंतरराष्ट्रीय विचारो में वसुधेव कुटंबकम का दृष्टिकोण प्रमुख था। उनकी मान्यता थी कि किसी राष्ट्र का समुचित उत्थान अपने परिवार, जाति, गाँव, प्रदेश तथा देश की समस्याओं के सुधर से हो सकता है। स्वयं को सुधारो, सारा विश्व सुधरेगा उनका कहना यही था।
'अ' उपसर्ग है -

A

आचरण में

B

अन्तरराष्ट्रीय में

C

अहिंसा में

D

अनुसार में

लिखित उत्तर

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