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वर्तमान हिन्दी कविता की भूमि में आज एक क...

वर्तमान हिन्दी कविता की भूमि में आज एक कोलाहल सा छा रहा है। लोग कहते हैं कि इस कविता के माध्यम से राजनीति साहित्य पर चढ़ी आ रही है और जिस कला-पक्ष में फूल और फलों की सजावट होनी चाहिए थी, उसमें मजदूरों के गन्दे चिथड़े चिमनियों का धुआँ और खेतों की धूल भरती जा रही है। शुद्ध कला के उपासकों को यह चिन्ता हो रही है कि साहित्य राजनीति के हाथ का रणवाद्य बनता जा रहा है और उसके प्राणों की कलामयी दीप्ति दिनोंदिन क्षीण होती जा रही है।
दूसरी ओर एक दल है जो शुद्ध कला की कृतियों को आनन्द और पलायन का प्रयास कहकर उसकी हँसी उड़ाता है। उसका विश्वास है कि जब जीवन में संघर्ष की आँधी चल रही हो, पराधीन राष्ट्र स्वतन्त्र होने के लिए आन्दोलन कर रहे हों। ऐसे समय में कवि का अपनी वैयक्तिक अनुभूति के मायाबन्ध में बंधे रहना जीवन के प्रति साहित्य को दायित्वहीनता का प्रमाण है। यह दल चाहता है कि साहित्य अपने कल्पना लोक से उतर कर पृथ्वी पर आए और निष्क्रियता त्याग कर प्रगति के मार्ग पर आरूढ़ हो।
'कविता' शब्द का वचन बदलिए

A

कविते

B

कविताएँ

C

कविता

D

इनमें से कोई नहीं

लिखित उत्तर

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