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Class 14
HINDI
ऊधौ, तुम हो अति बड़भागी। अपरस रहत सने...

ऊधौ, तुम हो अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
ज्यों जल माह तेल की गागरि, बूंद न ताकौं लागी।
प्रीति-नदी मैं पाऊँ न बोर्यो, दृष्टि न रूप परागी।
'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चांटी ज्यौं पागी।।
इन पंक्तियों में व्यंग्य क्या है -

A

कृष्ण के निकट रहकर भी उनके प्रेम रस में न डूब सके

B

कृष्ण के पास रहने का मौका मिला

C

कृष्ण के प्रति अनुराग उत्पन्न हो गया

D

कमल के समान जल से ऊपर रहते हो

लिखित उत्तर

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