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मैदान में सभा न होने देने के लिए पुलिस ब...

मैदान में सभा न होने देने के लिए पुलिस बंदोबस्त का विवरण देते हुए सुभाष बाबू के जुलूस और उनके साथ पुलिस के व्यवहार की चर्चा कीजिए।

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पुलिस का बंदोबस्त -
भोर से ही पार्कों एवं मैदानों को पुलिस द्वारा घेर लेना, मोटर लारियों में गोरखे एवं सार्जेंट का प्रत्येक मोड़ पर तैनात होना, ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ अन्य पुलिस बल द्वारा शहर में गश्त देना,
सुभाष बाबू का जुलूस एवं पुलिस का व्यवहार -
चार बजकर दस मिनट पर सुभाष बाबू द्वारा जुलूस लेकर आना, चौरंगी पर पुलिस द्वारा जुलूस को रोकना एवं लाठियाँ बरसाना , लाठियाँ पड़ने के बाद भी सुभाष बाबू द्वारा वंदे-मातरम बोलना, अंत में सुभाष बाबू को पकड़कर लाल बाजार लॉकअप में भेज देना।
मैदान में सभा न होने देने के लिए पुलिस ने धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस पर लाठी चलाई और सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर लॉकअप भेज दिया गया। स्त्रियाँ जुलूस बनाकर वहाँ से आगे चलीं तो बहुत भीड़ एकत्र हो गई थी। पुलिस ने लाठी चार्ज शुरू कर दिया, जिस कारण करीब 50-60 स्त्रियाँ वहीं मोड़ पर बैठ गईं और पुलिस उन्हें पकड़कर लाल बाजार ले गई। लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। पुलिस उन्हें रोकने का प्रयास करने के लिए लाठी चलाती जिससे लोग घायल हो जाते थे। लोगों को पकड़कर कुछ दूर पुलिस ले जाती और फिर छोड़ देती थी। इसमें 105 स्त्रियाँ पकड़ी गई थीं। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
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