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BIOLOGY
रुधिर दाब एवं नब्ज या नाड़ी (pulse) को स...

रुधिर दाब एवं नब्ज या नाड़ी (pulse) को समझाइए।

लिखित उत्तर

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प्रकुंचन (हृदय के संकुचन) के दौरान निलय संकुचित हो जाते हैं और रक्त को बलपूर्वक धमनियों में प्रवाहित कर देते हैं और ये धमनियाँ रुधिर को सारे शरीर में ले जाती हैं। धमनियों में प्रवाहित हो रहा रुधिर उनकी प्रत्यास्थ भित्तियों पर दबाव डालता है। इसी दबाव को रुधिर दाब (Blood Pressure) कहते हैं।
निलयों के संकुचन के समय रुधिर दाब अधिक ऊँचा होता है और उसे प्रकुंचनी दाब (Systolic pressure) कहते हैं। निलयों में जब शिथिलन होता है तब यह दाब घट जाता है। इस अपेक्षा निम्न दाब को अनुशिथिलनी दाब (diastolic pressure) कहते हैं। रुधिर दाब को मापने वाले यंत्र को स्फिग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer) कहते हैं।
रुधिर दाब के पठनांक 120/80 का अर्थ है कि व्यक्ति का प्रकुंचनी दाब 120 mm पारा तथा अनुशिथिलनी दाब 80 mm पारा है। एक स्वस्थ वयस्क का प्ररूपी पठनांक 120/80 mm पारा होता है
अनुशिथिलनी तथा प्रकुंचनी दाबों का अन्तर कलाई पर धमनियों की धड़कन के रूप में महसूस किया जा सकता है। कलाई पर इस धड़कन को नब्ज या नाड़ी (Pulse) कहते हैं। कलाई पर एक स्थान के ऊपर महसूस की जाने वाली धड़कन (प्रकुंचन के कारण) की प्रति मिनट संख्या को नाड़ीदर कहते हैं। यह संख्या हृदय-स्पन्दों की संख्या के बराबर होती है। अर्थात् सामान्य वयस्क में लगभग 72 स्पंद प्रति मिनट।
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