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Class 9
BIOLOGY
रोगों के निवारण की कौन-कौन सी विधियाँ है...

रोगों के निवारण की कौन-कौन सी विधियाँ हैं ? समझाइए।

लिखित उत्तर

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रोगों के निवारण (रोकथाम) की निम्न दो विधियाँ हैं-
(1) सामान्य विधियाँ
(2) रोग विशिष्ट विधियाँ
(1) सामान्य विधियाँ-इसमें हम निम्न उपाय प्रयोग करते हैं
(i) संक्रमित होने से बचाव-सबसे पहले हम संक्रमित होने से बचाव के उपाय करते हैं। ये उपाय रोग के संक्रमण होने पर आधारित हैं।
(a) वातोढ़ (वायु से फैलने वाले) रोगाणु से बचने के लिए इस तरह की परिस्थितियाँ बनाई जाती हैं कि रोगणु दूसरे व्यक्ति में न फैल सके और पर्यावरण में जीवित न रह सके। उदाहरणार्थ-रोगाणु यदि वायु द्वारा फैलता है तो पीड़ित व्यक्ति को अलग रखा जाना चाहिए व देखभाल करने वाले व्यक्ति को नाक पर कपड़ा या फिल्टर का प्रयोग करना चाहिए। रोगी के परिवेश को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यवर्धक रखें।
(b) जलोढ़ (जल द्वारा फैलने वाले) रोगाणुओं से बचाव के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित (safe) पेयजल आवश्यक है तथा रोगी के अपशिष्ट पदार्थों को जल में नहीं मिलने देना चाहिए, अच्छा हो जमीन में गाड़ दें।
(c) रोगवाहकों जैसे मच्छर, मक्खी व कॉकरोच आदि द्वारा होने वाले संक्रमण से बचने के लिए उनको समाप्त करना या वृद्धि रोकना आवश्यक है। मच्छरों के जनन को रोकने के लिए पानी का जमाव न होने दें तथा साफ व स्वच्छ वातावरण रखें। खाने की वस्तुओं को ढककर तथा मक्खी और कॉकरोच की पहुंच से दूर रखना चाहिए।
(ii) प्रतिरक्षा तंत्र की सक्रियता-जब कोई रोगाणु शरीर में प्रवेश करता है, तो प्रतिरक्षा तंत्र की विशिष्ट कोशिकाएँ सक्रिय हो जाती हैं और उससे लड़ने लगती हैं। यदि ये कोशिकाएँ रोगाणु को मारने में सफल हो जाती हैं तो हमें वह रोग नहीं होता। यदि ऐसा नहीं हो पाता तो हम उस रोग से पीड़ित हो जाते हैं। अतः रोग से बचने के लिए हमारे प्रतिरक्षा तंत्र का शक्तिशाली होना आवश्यक है। यह तभी सम्भव है जब हम पौष्टिक एवं संतुलित आहार समुचित मात्रा में लें और बुरी आदतों से दूर रहें। जैसे-धूम्रपान, नशीले पदार्थ एवं असुरक्षित यौन सम्बन्ध आदि।
(2) रोग विशिष्ट विधियाँ-रोगों के निवारण (रोकथाम) का अत्यधिक विशिष्ट एवं उचित उपाय है प्रतिरक्षाकरण (Immunisation) या टीकाकरण । इस विधि में, बहुत थोड़ी संख्या (मात्रा) में रोगाणु स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में डाल दिए जाते हैं। रोगाणु के प्रवेश करते ही प्रतिरक्षा तंत्र .धोखे. में आ जाता है, और उस रोगाणु से लड़ने वाली विशिष्ट कोशिकाओं का उत्पादन आरम्भ कर देता है। इस प्रकार रोगाणु को मारने वाली विशिष्ट कोशिकाएँ शरीर में पहले से ही निर्मित हो जाती हैं और जब रोग का रोगाणु वास्तव में शरीर में प्रवेश करता है तब प्रवेशित रोगाणु से विशिष्ट कोशिकाएँ लड़ती हैं और उसे मार देती हैं।
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