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Class 6
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वीर पुरुष का शरीर कुदरत की समस्त ताकतों ...

वीर पुरुष का शरीर कुदरत की समस्त ताकतों का भण्डार है।कुदरत का यह केन्द्र हिल नहीं सकता। सूर्य का चक्कर हिल जाए, तो हिल जाए, परन्तु वीर के दिल में जो देवी केन्द्र है, वह अचल है।कुदरत की नीति चाहे विकसित होकर अपने बल को नष्ट करने की हो मगर वीरों की नीति, दल को हर तरह से इकट्ठा करने और बढ़ाने की होती है। वह वीर क्या, जो टिन के बर्तन की तरह झट से गर्म और ठण्डा हो जाता है। सदियों नीचे आगजलती हो तो भी शायद गर्म हो और हजारों वर्ष बर्फ उस पर जमती रहे तो भी क्या मजाल जो उसकी वाणी तक ठण्डी हो। उसे खुद गर्म और सर्द होने से क्या मतलब। सत्य की सदा जीत होती है। यह भी वीरता का एक चिह्न है। विजय वही होती है, जहाँ पवित्रता और प्रेम है। दुनिया धर्म और अटल आध्यात्मिक नियमों पर खड़ी है, लेकिन जो अपने आप को उन नियमों के साथ अभिन्न करके रहता है, उसी की विजय होती है।
जब हम कभी वीरों का हाल सुनते हैं तब हमारे अन्दर भी वीरता की लहरें उठती हैं और वीरता का रंग चढ़ जाता है, परन्तु प्रायः वह चिरस्थायी नहीं होता। इसका कारण यही है कि हम सब केवल दिखाने के लिए वीर बनना चाहते हैं। टिन के बर्तन का स्वभाव छोड़कर अपने जीवन के केन्द्र में निवास करो और सच्चाई की चट्टान पर दृढ़ता से खड़े हो जाओ। बाहर की सतह को छोड़कर जीवन की तहों में घुसो तब नए रंग खिलेंगे।
'कुदरत' का पर्यायवाची है।

A

परमात्मा

B

प्रकृति

C

ईश्वर

D

ये सभी

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
D

कुदरत के पर्यायवाची परमात्मा, प्रकृति एवं ईश्वर ये सभी है। ब्रह्म विधि जगन्नाथ आदि भी ईश्वर के समानार्थी है।
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