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प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में परीक्षा के ...

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में परीक्षा के अनेक अवसर आते रहते हैं, जिनमें व्यक्ति सफल और असफल होते रहते हैं। महत्त्व इस बात का नहीं है कि सफल होने वाले कितने कम या अधिक है अथवा असफल होने वाले कितने अधिक या कम हैं। वरन प्रश्न उठता है कि कितने व्यक्ति ऐसे हैं जो इस स्थिति में भी दृढ रह सकते हैं। दुर्बल, तो वे नहीं जो गरीब और कमजोर है, वरन वे व्यक्ति जो लोभ या प्रलोभन के वशीभूत होकर कौड़ियों के भाव अपने अनमोल चरित्र को देव डालते हैं और समाज के सामने अपनी साफ-सुथरी छवि को मतिन कर डालते हैं। ऐसे तात्कालिक लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्ति उसलोभी और अदूरदर्शी मक्खी की भांति है, जो चापानी के सोभको न संवरण कर सकने के कारण अपने प्राणों की आहुति दे देती है। मृत्य को प्राप्त होना तो प्रकृति है. किन्तु लोभी प्रवत्ति वाले व्यक्ति की शारीरिक मृत्यु के साथ ही उसके चरित्र का भी पतन हो जाता है। काम, क्रोथ, मद, लोभ आदि मनोविकारों में लोभ सबसे प्रबल मनोविकार है. जो पाप का मूल है। व्यक्तिं लोभ अथवा प्रलोभन में लिप्त रहने के कारण तरह-तरह के अनर्थ करने लगता है। लोभी व्यक्ति की कामनाओं की पूर्ति कभी नहीं होती है। वह सदैव उस अगाध सिन्धु की तरह अतृप्त ही रहता है जो अनगिनत नदियों द्वारा लाई गई अपार जलराशि को अपने में ही समेटता रहता है। यदि ऐसे व्यक्ति की कामनाओं के अनुरूप आवश्यकताओं की पूर्ति की प्रार्थना प्रभु स्वीकार भी कर लें, तब भी लोभी व्यक्ति रेगिस्तान की तपती हई रेत के समान ही अतृप्त रहता है। जिसे मेघ अपार जलराशि उड़ेलने पर भी उसकी प्यास बुझा सकने में अक्षम रहते है। व्यक्ति की सफलता-असफलता था हानि-लाभ की दशा में भी अपनी दृढ़ता को बनाए रखना और लोभ अथवा प्रलोभन कितना बड़ा है या केटा महत्वहीन है। महत्व इस बात का है कि मनुष्य कितना दृढ़संकल्पी है। लोभ मनुष्य की आँखों के आगे आवरण हाल देता है, जिससे वह वस्तु या व्यक्ति के वास्तविक स्वरूप को नहीं समझ पाता है। लोभ के प्रति आकर्षित होते ही मनुष्य का विवेक तुप्त हो जाता है अर्थात लोभका मूल अशानता या विवेकान्यता ही होती है।
जीवन की परीक्षा में मनुष्य को असफलता से

A

सीख लेकर निर्णय करना चाहिए

B

विचलित हुए बिना अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।

C

बचना चाहिए

D

दूर रहना चाहिए

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
B

विचलित हुए बिना अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।
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