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प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में परीक्षा के ...

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में परीक्षा के अनेक अवसर आते रहते हैं, जिनमें व्यक्ति सफल और असफल होते रहते हैं। दुर्बल, तो वे नहीं जो गरीब और कमजोर है, वरन वे व्यक्ति जो लोभ या प्रलोभन के वशीभूत होकर कौड़ियों के भाव अपने अनमोल चरित्र को देव डालते हैं और समाज के सामने अपनी साफ-सुथरी छवि को मतिन कर डालते हैं। ऐसे तात्कालिक लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्ति उसलोभी और अदूरदर्शी मक्खी की भांति है, जो चापानी के सोभको न संवरण कर सकने के कारण अपने प्राणों की आहुति दे देती है। मृत्य को प्राप्त होना तो प्रकृति है. किन्तु लोभी प्रवत्ति वाले व्यक्ति की शारीरिक मृत्यु के साथ ही उसके चरित्र का भी पतन हो जाता है। लोभ मनुष्य की आँखों के आगे आवरण हाल देता है, जिससे वह वस्तु या व्यक्ति के वास्तविक स्वरूप को नहीं समझ पाता है। लोभ के प्रति आकर्षित होते ही मनुष्य का विवेक तुप्त हो जाता है अर्थात लोभका मूल अशानता या विवेकान्यता ही होती है।
लोभ का मूल कारण क्या है?

A

भौतिक सुख की लालसा

B

स्वार्थपरता

C

विकार

D

विवेकशून्यता

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
D

विवेकशून्यता
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