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Class 6
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इस अनुभाग में चार अनुच्छेद दिए गए हैं। प...

इस अनुभाग में चार अनुच्छेद दिए गए हैं। प्रत्येक अनुच्छेद के अन्त में पाँच प्रश्न दिए गए हैं। प्रत्येक अनुच्छेद को ध्यान से पढ़िए और उस पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए। प्रत्येक प्रश्न के चार सम्भावित उत्तर दिए गए हैं जिन पर (1),(2),(3) और (4) क्रमांक अंकित हैं। इन उत्तरों में केवल एक ही सही है। आपको सही उत्तर पहचानना है।
यह तो साधक की अन्तर रुचि पर निर्भर करेगा कि वह प्रभु को किस रूप में स्वीकार करे। प्रभु के किस नाम पर उसको परम विश्वास हो जाए। सच्चाई तो यही है कि सभी नाम प्रभु के हैं और सभी रूप प्रभुके है। ये बातें उन महापुरुषों की है जो ईश्वर के बताए रास्ते पर चले और उसमें इतनी गहराई पर चले गए कि जीवन की वास्तविकता को जान गए। वे यह सब जानने के बाद ही इस नतीजे पर पहुंचे कि सभी नाम और रूप एक ही प्रभु के हैं। धीरे-धीरे साधक अपने रास्ते चलते-चलते भक्ति के शिखर पर पहुंचा है। हमारी जिस पर आस्था होती है हम उसी की महिमा का गुणगान करते हैं। कहावत है कि अनुभवी और महान पुरुष जिस रास्ते पर चलें, उसी पर चलना चाहिए, क्योंकि उन्होंने दुनिया और समाज को अच्छे ढंग से देखा है। जब सन्त पुरुष अपने रास्ते पर चलने पर प्राप्त अनुभवों को बताते हैं और उस रास्ते में जो रोजक बिन्दु आए उनका वर्णन करते हैं तब मंजिल पर चलने वालों का उत्साह और बढ़ता हैं साथ-साथ ज्ञानवर्धन भी होता रहता है, ऐसे ही यात्री भक्त कहलाते हैं। इसी प्रकार सन्त पुरुषों के अनेक अनुयायी बन जाते हैं, फिर वे सभी अनुसरण करने वाले जिस रास्ते पर चलते हैं वह प्रेमपथ कहलाता है। जो साधक प्रेमपथ को पकड़ते हैं वह मंजिल को आसानी से पा लेते हैं और जो रास्ता भटक जाते हैं वे कभी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते। इसलिए यह कहा गया है कि प्रभु का नाम और रूप सब एक ही हैं इसलिए सन्तो ने हमें जो शिक्षा दी है उसी में एकनिष्ठ होकर आगे बढ़ना हैं तभी जीवन में निश्चित रूप से सफलता और मंजिल मिलेगी। मानव जीवन का आदर्श यही है। भौतिक जगत की सुविधाओं के आकर्षण में फंसकर व्यक्ति औचित्य एवं विवेक की अनदेखी करता रहता है, जिसका परिणाम तमाम समस्याओं के रूप में उसके सामने आता है। जिनसे निजात पाने के प्रयास में उसकी पूरी उम्र चली जाती है और वह जहाँ का जहाँ बना रहता है। मनुष्य चाहे. तो अपने हृदय की बात सुनकर अपने मस्तिष्क से सामंजस्य बैठाए, क्योंकि हृदय भावुक होता है। इस तरह जीवन पथ पर चलने से प्रभु अवश्य मदद करेंगे, बशर्ते उनका स्मरण सच्चे मन से किया जाए।
भगवान को स्वीकार करना किस पर निर्भर करता है?

A

साधक की आन्तरिक अभिरुचि पर

B

साधक के ज्ञान की गहराई पर

C

साधक के कुटुम्बों की सलाह पर

D

उपरोक्त में से कोई नहीं

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
A

साधक की आन्तरिक अभिरुचि पर
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