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मरुस्थलों में बहुत-सा पशु जीवन प्राप्त ह...

मरुस्थलों में बहुत-सा पशु जीवन प्राप्त होता है। रात में रेगिस्तानी छिपकलियाँ अपने छिद्रों से बाहर निकलती हैं। अनेक प्रकार के जहरीले साँप, बिच्छू, लोमडियाँ और कीड़े-मकोडे और पक्षी प्राप्त होते हैं। सहारा, अरब और थार के मरुस्थलों में अपना सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में ऊँटों का उपयोग स्थानीय लोगों के द्वारा किया जाता हैं। ऊँट जिसे मरुस्थल का जहाज' भी कहा जाता है, बालू में मीलों चल सकता है। इसकी आँखों की बरौनियाँ लम्बी होती हैं और यह अपने नाक के छिद्रों को बन्द रख सकता है। इससे यह रेत से अपनी आँखों और नाक को बचा सकता है। इसके पैर सपाट और गद्देदार होते हैं और पीठ पर एक या दो कूबड़ होते हैं। ऊँट एक बार में अनेक लीटर पानी पी सकता है और उसके बाद एक सप्ताह से अधिक तक बिना पानी के चल सकता है। मरुस्थल के निवासियों के लिए ऊँट अपरिहार्य है।
ऊँट अपनी नाक और आँखों को रेत से कैसे बचाता है?

A

गद्देदार पैर होने से

B

लम्बी बरौनियों और नाक बन्द रखने की क्षमता से

C

पीठ पर एक या दो कूबड़ होने से

D

हफ्तों तक बिना पानी के जीवित रहने से

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
B

ऊँट अपनी नाक बन्द रख सकता है तथा आँखों की लम्बी बरौनियाँ होती हैं जो रेत से आँखों को बचा सकती हैं।
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