चरम जलवायवी परिस्थितियों वाले पृथ्वी के दो क्षेत्र निम्नलिखित हैं
(i) ध्रुवीय क्षेत्र-ये ध्रुवों के पास स्थित होते हैं, जैसे उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव ध्रुवीय क्षेत्र के कुछ परिचित देश कनाडा, ग्रीनलैण्ड, आइसलैण्ड, नार्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड तथा अमेरिका में अलास्का और रूस के साइबेरियाई क्षेत्र हैं। ध्रुवीय क्षेत्रों में चरम जलवायु पायी जाती है। ये क्षेत्र सदैव बर्फ से ढके रहते हैं। ध्रुवों पर छ: महीने के दिन और छः महीने की रात पायी जाती है। सर्दियों का तापमान `- 37^(@) C ` तक हो जाता है। यहाँ रहने वाले जन्तु, जैसे ध्रुवीय भालू (पोलर बियर), पेंग्विन, अनेक प्रकार की मछलियाँ, कस्तूरी मृग, रेनडियर, लोमड़ी, सील, व्हेल तथा अन्य कई प्रकार के पक्षी इन चरम स्थितियों में रहने के लिए अनुकूलित हो गए हैं।
(ii) उष्णकटिबंधीय वर्षावन- उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की जलवायु सामान्यत: गर्म होती है, क्योंकि ये क्षेत्र भूमध्यरेखा के आस-पास स्थित होते हैं । यहाँ सबसे सर्द महीनों में भी तापमान सामान्यत: ` 15^(@) C ` से अधिक रहता है। गर्मियों में तापमान ` 40^(@) C ` से अधिक हो जाता है। वर्षभर दिन और रात की लम्बाई लगभग बराबर होती है। इन क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में वर्षा होती है। इस क्षेत्र की एक प्रमुख विशेषता उष्णकटिबंधीय वर्षावन है। उष्णकटिबंधीय वर्षावन, भारत में पश्चिमी घाटों और असम में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त ऐसे वन दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य अमेरिका और मध्य अफ्रीका में भी पाए जाते हैं। सतत् गर्मी और वर्षा के कारण इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के पादप और जन्तु पाए जाते हैं। वर्षावनों में पाए जाने वाले प्रमुख प्रकार के जन्तुओं में बंदर, कपि (ऐप्स), गुरिल्ला, शेर, चीता, हाथी, तेंदुआ, छिपकली, सर्प, पक्षी और कीट हैं।