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Class 14
HINDI
थूके, मुझे पर त्रैलोक्य भले ही थूके, ...

थूके, मुझे पर त्रैलोक्य भले ही थूके,
जो कोई जो कह सके, कहे, क्यों चूके?
छीने न मातृपद किंतु भरत का मुझसे
रे राम दुहाई करूँ और क्या तुझसे?
कहते आते थे यही अभी नरदेही,
माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र भले ही।
अब कहें सभी यह हाय! विरुद्ध विधाता'
हे पुत्र पुत्र ही, रहे माता कुमाता।'
बस मैंने इसका बाह्य-मात्रा ही देखा,
दृढ़ हृदय ने देखा मृदुल गात्र ही देखा।
. इस काव्यांश का शिल्प सौंदर्य है

A

'बाह्य-मात्र', 'मृदुल गात्र', जैसे तत्सम शब्दों के कारण

B

सरल और सहज भावावेगमयी भाषा के कारण

C

'माता न कुमाता, पुत्र कुपुत्र उक्ति के कारण

D

'थेकू, मुझ पर त्रैलोक्य भले ही थूके' उक्ति के कारण

लिखित उत्तर

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