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स्वावलंबन की कुंजी है । स्वावलंबी व्यक्त...

स्वावलंबन की कुंजी है । स्वावलंबी व्यक्ति जीवन में यश और धन दोनों अर्जित करता है । दसरे के सहारे जीने वाला व्यक्ति तिरस्कार का पात्र बनता है । निरतर निरादर और तिरस्कार पाता हुआ वह अपने आप में हीन भावना से ग्रस्त होने लगता है । जीवन का यह तथ्य व्यक्ति के जीवन पर ही नहीं, वरन जातीय व राष्ट्र पर भी लागू होता है | यही करक है कि स्वाधीनता संघर्ष के दौरान गांधीजी ने देशवासियों में जातीय गौरव का भाव जगाने हेतु स्वावलंबन का संदेश देश दिया था । चरखा-आंदोलन और डांडी कूच इस दिशा में गांधीजी के बड़े प्रभावी कदम सिद्ध हए । स्वावलंबन के मार्ग पर चलकर ही व्यत्कि, जाती, समाज अथवा राष्ट उत्कर्ष को प्राप्त होते है |
'हीन-भावना' शब्द में कौन सा समास है ?

A

कर्मधारय

B

अव्ययीभाव

C

द्वंद्व

D

बहुव्रीहि

लिखित उत्तर

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