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प्रत्येक राष्ट्राभिमानी के हृदय में अपने...

प्रत्येक राष्ट्राभिमानी के हृदय में अपने देश, अपने देश की संस्कृति तथा भाषा के प्रति प्रेम और अभिमान सहज ही होता है। वह अपने राष्ट्र, अपनी जन्मभूमि और राष्ट्रभाषा के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने को सदैव तत्पर रहता है, जिस देश के निवासियों के हृदय में यह उत्सर्ग भावना ता वह राष्ट्र, पराधीन होकर अपनी सुख-शान्ति और समृद्धि सदा के लिए खो बैठता है। देशभक्ति और सार्वजनिक हित के बिना राष्ट्रीय महत्ता का अस्तित्व ही नहीं रह सकता। यह भावना उसे इस बात का प्रयत्न करने को प्रेरित करती है कि वह अन्याय से दुर्बलों की रक्षा कर अनौचित्य का निवारण करे, धर्म पर स्थिर रहे और न्याय के लिए लड़े। समाज को हानि पहुँचाकर अनुचित लाभ उठाना एकदम अस्वीकार कर दें। अपने समाज के प्रति कर्तव्य से मुख मोड़कर उसे धोखा न दे।
गद्यांश में किस शब्द का प्रयोग नहीं है

A

उत्सर्ग

B

भक्ति

C

हानि

D

अधर्म

लिखित उत्तर

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