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प्राचीनकाल में मनुष्य छोटे-छोटे समूहों म...

प्राचीनकाल में मनुष्य छोटे-छोटे समूहों में रहता था। उस समय वह एक-दूसरे के साथ रहने की कला ठीक से नहीं जानता था। वह आपस में लड़ता था और एक-दूसरे को कष्ट पहुँचाता था। यह बात भी सही है कि वह आपस में प्रेम करता था, परन्तु यह प्रेम केवल उसके समूह तक ही सीमित था। इस कारण प्रारम्भ से ही मनुष्य का जीवन अशान्त और दुःखी रहा। वह सुख-शान्ति चाहता था, पर यह नहीं जानता था कि उसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है? वह सोचता था कि दूसरों को दुःखी बनाकर सुख प्राप्त किया जा सकता है। अपने सुख के लिए दूसरों को दुःखी बनाने का परिणाम बहुत बुरा हुआ। मनुष्य के जीवन से सुख बिल्कुल समाप्त हो गया। महापुरुषों ने सदा से ही मनुष्यों के दुःखों को दूर करने का प्रयास किया है। उन्होंने जो महत्त्वपूर्ण बात बताई वह यह है कि दूसरों के दुःख को अपना दुःख और सुख को अपना सुख मानो, तो सदा सुखी रहोगे।
प्रारम्भ से ही महापुरुषों ने क्या प्रयास किया है?

A

उपदेश देने का

B

यज्ञ करने का

C

मनुष्य के दुःख दूर करने का

D

कर्मकाण्डों का प्रचार करने का

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C
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