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मुझे मालूम नहीं था कि भारत में 'तिलोनिया...

मुझे मालूम नहीं था कि भारत में 'तिलोनिया' नाम. की कोई जगह है जहाँ हमारे देश के समसामयिक इतिहास का एक विस्मयकारी पन्ना लिखा जा रहा है। उस वक्त तक तिलोनिया के बारे में मुझे इतनी ही जानकारी थी कि वहां पर एक स्वावलम्बी विकास केन्द्र चल रहा है, जिसे स्थानीय ग्रामवासी, स्त्री-पुरुष मिल-जुलकर चला रहे हैं। मुझे वहाँ जाने ' का अवसर मिला। बस्ती क्या थी, कुछ पुराने और कुछ नये छोटे-छोटे घरों का झुरमुट थी।
वहाँ एक सज्जन ने बताया कि एक सुनिश्चित तथा उसके दो साथियों -टाइपिस्ट तथा फोटोग्राफर ने मिलकर 1972 में इस संस्थान की स्थापना की। संस्थान का नाम था सामाजिक कार्य तथा शोध-संस्थान (एस डब्ल्यू आर सी)।
मेरे मन में संशय उठने लगे थे आज के जमाने में वैज्ञानिक उपकरणों की जानकारी के बल पर ही तरक्की की जा सकती है। उससे हटकर और अवहेलना करते हुए नहीं की जा सकती है। एक पिछड़े हुए गाँव के लोग अपनी समस्याएँ स्वयं सुलझा लेंगे, यह असम्भव था। वह सज्जन कहे जा ...रहे थे "हमारे गाँव आज नहीं' बसे हैं। इन गांवों में शताब्दियों से हमारे पूर्वज रहते आ रहे हैं। पहले जमाने में भी हमारे लोग सूझ और - पहलकदमी के बल पर ही अपनी दिक्कते सुलझाते रहे होंगे। जरूरत इस बात की है कि हम शताब्दियों की इस परम्परागत जानकारी को नष्ट न होने दें। उसका उपयोग करें।" फिर मुझे समझाते हुए बोले "हम बाहर की जानकारी से भी पूरा-पूरा लाभ उठाते हैं, पर मूलतः स्वावलम्बी बनाना चाहते हैं स्वावलम्बी,आत्मनिर्भर।" मुझे बार-बार गाँधी जी के कथन याद आ रहे थे। मैंने गाँधी जी का जिक्र किया तो वह बड़े उत्साह से बोले "आपने ठीक ही कहा। यह संस्थान गांधी जी की मान्यताओं के अनुरूप ही चलता है सादापन, कर्मठता, अनुशासन, सहभागिता। यहाँ सभी निर्णय मिल-बैठकर किए जाते. हैं। आत्म-निर्भरता ...." आत्म-निर्भरता से मतलब कि ग्रामवासियों की छिपी क्षमताओं को काम में लाया जाए और गांधी के अनुसार, ग्रामवासी अपनी अधिकांश बुनियादी जरूरत की वस्तुओं का उत्पादन स्वयं करें ...।
(एक तीर्थ यात्रा, स्रोत : भीष्म साहनी)
लेखक का मानना था

A

ग्रामवासियों को अपनी समस्याएं स्वयं सुलझाने की आदत है।

B

आधुनिक समय में वैज्ञानिक उपकरण और जानकारी से कटकर या उसकी अवहेलना करके तरक्की नहीं की जा सकती है

C

आधुनिक समय में वैज्ञानिक उपकरणों और जानकारी के बल पर तरक्की नहीं की जा सकती है

D

ग्रामवासी अपनी समस्याएं स्वयं सुलझा सकते हैं

लिखित उत्तर

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