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निदान-निदान की परिभाषा (Definition Of Di...

निदान-निदान की परिभाषा (Definition Of Diagnostic)|पिछड़ेपन के प्रकार (Types Of Backwardness)|निदान प्रक्रिया के अंग (Parts Of Diagnostic Process)|पिछड़ेपन के कारण (Causes Of Backwardness)|उपचारात्मक शिक्षण और उसकी विधियाँ(Techniques Of Remedial Teaching )|उपचारात्मक शिक्षण के उपाय |OMR

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चिन्तन (Thinking)|चिन्तन के प्रकार (Types Of Thinking)|चिन्तन की प्रक्रिया/चरण (Thinking Process/Step)|चिंतन के साधन (Means Of Thinking)|OMR|Summary

Teaching Learning Process (शिक्षण अधिगम प्रक्रिया)|Types Of Education (शिक्षा के प्रकार)|Formal Education (औपचारिक शिक्षा)|Informal Education (अनौपचारिक शिक्षा)|OMR

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First Generation Learners (प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी)|Features Of First Generation Learners (प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी विशेषताएँ)|Causes Of Not Making Adjustment In Education Process By First Generation Learners (प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी के शिक्षण प्रक्रिया में सामंजस्य स्थापित न कर पाने के कारण)|Remedies To Make The First Generation Learners Adjust With Teaching Process (प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी के शिक्षण प्रक्रिया में सामंजस्य स्थापित करने के लिए सुझाए गए उपाय)|OMR

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कैंसर|गुण|कैंसर के प्रकार|अब्रुद के प्रकार|कैंसर के कारण|कैंसर अभिज्ञान और निदान|कैंसर के उपचार|OMR

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपनी संस्कृति से परिचित होते है , वैसे ही अन्य भाषा पढ़कर उस संस्कृति का हमें परिचय मिलता है। साथ ही अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपने भाषा - भाषी लोगो से जुड़ते है , हमारे व्यक्तित्व का समाजीकरण होता है और हमारी दृष्टि की संकीर्णता कम हो जाते है उसी प्रकार अन्य भाषा पढ़कर हम अपने से ऊपर उठकर बाहर से जुड़ते है हमारे व्यक्तित्व का अंतराष्ट्रीयकरण होता है और हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है। इस तरह ,जैसे मातृभाषा - शिक्षण का महत्तम उदेशय व्यक्ति के व्यक्तित्व को 'स्व ' से उठाकर पुरे मातृभाषी समाज के उपयुक्त बनाना होता है वैसे ही अन्य भाषा -शिक्षण का महत्तम उदेश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को अंतराष्ट्रीय स्तर देना है जिस व्यक्ति ने जितनी अधिक अन्य भाषाएँ सच्चे अर्थो में सीखी होंगी , उसके व्यक्तित्व में यह मुक्तता और अंतराष्ट्रीय उतनी ही अधिक होगी। अंतराष्ट्रीय के कारण हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है से लेखक का तात्पर्य है