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BIOLOGY
संकरण से आप क्या समझते है ? इसकी आवश्यकत...

संकरण से आप क्या समझते है ? इसकी आवश्यकता तथा नियमो का वर्णन कीजिए ।

लिखित उत्तर

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पादप संरक्षण
(Plant Conservation)
पादप संरक्षण द्वारा पौधों के जीवन, उनकी उचित वृद्धि तथा विकास एवं प्रजनन को सुनिश्चित किया जाता है। इसलिए पौधों का अच्छा रख-रखाव, मनुष्य के लिए लाभदायक पौधों की अच्छी पैदावार तथा उनके किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकना भी पादप संरक्षण का ध्येय है। Conservation (संरक्षण) शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है Con = together तथा Servare = keep safel
प्रकृति के गर्भ में छिपी किसी भी जाति एवं जीन को संकट में न पड़ने देना पादप संरक्षण का मुख्य उद्देश्य है।
पादप संरक्षण की आवश्यकता
(Necessity of Plant Conservation)
वन्य पौधों के संरक्षण की आवश्यकता के निम्नलिखित कारण हैं
(1) प्राकृतिक चक्र (Natural Cycle)-आर्थिक महत्त्व के साथ-साथ वन्य पौधे समुदाय, खाद्य-शृंखला तथा पारिस्थितिक तन्त्र में सन्तुलन बनाए रखते हैं। इस प्रकार वन्य जीवन पर्यावरण को एक स्वतः नियामक तन्त्र के रूप में स्थिरता प्रदान करता है।
(2) जीन बैंक (Gene Banks)-संकरण योग्य वन्य पौधों को जिन प्राकृतिक स्थानों में सुरक्षित रखते हैं, उन्हें जीन बैंक (gene banks) कहते हैं। सामान्य रूप से पाए जाने वाले वन्य पौधे तथा आर्थिक महत्त्व के रूप से पाए जाने वाले पौधे, दोनों ही मनुष्य के लिए उपयोगी हैं, क्योंकि वन्य पौधों तथा आर्थिक रूप से उपयोगी पौधों के मध्य संकरण द्वारा पौधों की रोग-प्रतिरोधी तथा अधिक उत्पादन वाली उन्नत किस्मों का विकास सम्भव हो सका है।
(3) जैव-विभिन्नता (Bio-diversity)-इस व्यापक संसार में पौधों एवं जीव जन्तुओं की लाखों जातियाँ हैं। इन लक्षणों को सुरक्षित रखने के लिए यह आवश्यक है कि पौधों को विलुप्त होने से रोका जाए।
(4) आवश्यक पूर्ति (Essential Supply)-जैसे-जैसे जनसंख्या की वृद्धि होती गई, उसी अनुपात में आवश्यक हो गया कि अधिक खाद्य उत्पादन के लिए प्रमुख जातियों तथा जीन को सुरक्षित कर खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाया जाए।
पादप संरक्षण के उद्देश्य
(Aims of Plant Conservation)
(1) संकटग्रस्त (endangered) तथा दुर्लभ जातियों (rare species) की रक्षा करना।
(2) सभी जातियों के पूर्ण जीन-पूल का संरक्षण करना|
(3) पारिस्थितिक तन्त्र के जैविक एवं अजैविक घटकों के मध्य समायोजन रखना।
(4) प्राकृतिक सन्तुलन बनाए रखना।
(5) सभी उपस्थित पादप जातियों का मानव हित में सम्पूर्ण उपयोग किया जाना।
पादप संरक्षण की उपयोगिता तथा जनजीवन में उसका महत्त्व
(Utility of Plant Conservation and its Significance in Human Life)
वन्य पौधों के कुछ मुख्य उपयोग तथा महत्त्व निम्नलिखि त हैं -
(1) वातावरण में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का सन्तुलन (Balance of `O_(2)` and. `CO_(2)` in Atmosphere)-हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड (`CO_(2)`) ग्रहण कर कार्बनिक भोज्य पदार्थों का निर्माण करते हैं और सह उत्पाद के रूप में वातावरण में ऑक्सीजन `(O_(2))` मुक्त करते हैं, जिसे समस्त जन्तु ग्रहण करते हैं। पदार्थों के जलने से सड़ने से तथा जीवधारियों के श्वसन से वातावरण में `CO_(2)` मुक्त होती है। यदि पौधों द्वारा वातावरण में उपस्थित `CO_(2)`, का उपयोग न हो तो वातावरण में `CO_(2)`, की सान्द्रता बढ़ जाएगी. परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जीवधारियों का जीवन समाप्त हो जाएगा। इस प्रकार पौधे तथा जन्तु वातावरण में `O_(2)`, तथा `CO_(2)` का सन्तुलन बनाए रखते हैं। पौधे वातावरण को प्रदूषित होने से भी बचाते हैं।
(2) राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था (Economy of Nations)-विभिन्न प्रकार के उद्योग वनस्पतियों पर निर्भर हैं। इनसे राष्ट्र की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ एवं मजबूत होती है। कागज, जूट, कंपड़ा उद्योग, विभिन्न प्रकार के पशु आहार, ऐल्कोहॉल, कॉफी, कहवा एवं चाय उद्योग, आयुर्वेदिक औषधियों तथा विभिन्न प्रकार के तेल आदि वनस्पतियों की ही देन हैं।
(3) खाद्य पदार्थ तथा अन्य उपयोगी वस्तुएँ (Eatables and Other Useful Things)-पौधों से ही हमारी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। खाद्य पदार्थ (अनाज, सब्जी, फल आदि), तेल, मसाले, ईंधन तथा वस्त्र हेतु रेशे, रेशम, पेय पदार्थ (कॉफी एवं चाय), इमारती लकड़ियाँ, औषधियाँ, पशु आहार आदि उपयोगी वस्तुएँ पौधों से ही प्राप्त होती है। पौधे प्रदूषण तथा मृदा अपरदन को भी नियन्त्रित करते हैं अत: पौधों के बिना मानव तथा जन्तुओं का जीवन असम्भव है।
(4) जीन बैंक (Gene Banks) अधिकांश पौधों से हमें प्रत्यक्ष लाभ दिखाई देता है, परन्तु बहुत से ऐसे वन्य पौधे है जिनसे हमें प्रत्यक्ष लाभ नहीं दिखाई पड़ता है। वन्य पौधों में अनेक रोग-प्रतिरोधी तथा अनुकूलन योग्य गुणों के जीन होते हैं। आधुनिक वैज्ञानिकों ने संकरण द्वारा अनेक नई नई रोग-प्रतिरोधी तथा अधिक उत्पादन वाली उपजातियों को विकसित किया है। ऐसे संकरण योग्य वन्य पौधों के अध्ययन तथा प्रयोगों के लिए उन्हें उनके प्राकृतिक स्थानों में ही सुरक्षित रखना आवश्यक है। ऐसे सुरक्षित स्थानों को जीन बैंक (gene banks) कहते हैं।
(5) जैव-विभिन्नता (Bio diversity)---विश्वभर में पायी जाने वाली पौधों की जातियों में असंख्य महत्त्वपूर्ण लक्षण पाए जाते हैं। ये लक्षण 3.6 अरब वर्षों से हो रहे विकास के स्वाभाविक परिणाम हैं। इन विभिन्न लक्षणों को सुरक्षित रखने के लिए यह आवश्यक है कि इन पौधों को नष्ट होने से रोका जाए।
(6) पौधों का अज्ञात महत्त्व (Unknown importance of plants)-अनेक ऐसे पौधे हैं जिनके उपयोग हमें अभी तक ज्ञात नहीं हैं। भविष्य में ऐसे पौधे सम्भवतः अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होंगे।
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