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BIOLOGY
पौघों में अवशोषण की विभिन्न विधियों का व...

पौघों में अवशोषण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए ।

लिखित उत्तर

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पादप संरक्षण की विधियाँ
(Methods of Conservation of Plants)
(1) जननद्रव्य का संग्रह एवं संरक्षण (Collection and Preservation of Germplasm)-वन्य पौधों में रोग व कीट प्रतिरोधी जीन तथा अन्य उपयोगी जीन पाए जाते हैं। अत: ऐसे पौधों के बीज, परागकण व अण्ड कोशिकाओं को जननद्रव्य या जर्मप्लाज्म के रूप में सुरक्षित रखकर उपयोग में लाया जाता है।
(2) संरक्षण के लिए कानन (Legislation for Conservation) विभिन्न देशों ने वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अनेक कानून बनाए हैं। प्रकृति तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) ने विश्व वन्यजीव कोष (WWLF) की स्थापना की है जिसका सदस्य भारत भी है। पादप संरक्षण के लिए इसके द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन किया जा रहा है।
(3) अत्यधिक उपयोग पर नियन्त्रण (Control on Over-exploitation)-भारत वन्य प्राणिजात व वनस्पतिजात । की क्षति-आशंकित जातियों के व्यापार की अन्तर्राष्ट्रीय सभा (CITIES) को सदस्य है। इसके अन्तर्गत क्षति-आशंकित पौधों के अनावश्यक उपयोग पर रोक लगाई गई है तथा उनके व्यापार को नियन्त्रित किया गया है।
(4) जीन बैंकों की स्थापना (Establishment of Gene Banks)-दुर्लभ एवं संकटग्रस्त जातियों को जिन सुरक्षित क्षेत्रों में उगाया जाता है, वे .जीन बैंक. कहलाते हैं। जीन बैंक में कायिक अंगों व बीजों द्वारा उगाकर इन पौधों को सुरक्षित रखा जाता है।
(5) राष्ट्रीय उद्यानों एवं प्राकृतिक आवास-स्थलों की स्थापना (Establishment of National Parks and Natural Reserves)-पौधों को उनके प्राकृतिक आवासों में सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसे स्वस्थाने (in situ) संरक्षण कहते है। ऐसे आवासों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाता है। इसी उद्देश्य से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय उद्यान, शरण स्थल तथा जैवमण्डल रिजर्व स्थापित किए हैं।
(6) क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation)- इसके अन्तर्गत दुर्लभ तथा संकटग्रस्त पौधों के जर्मप्लाज्म को बहुत कम ताप (-`196^(@)C`) पर संगृहीत किया जाता है। इससे जैविक क्रियाएँ, विभाजन क्रियाएँ एवं आनुवंशिकी प्रभावित नहीं होती है। इसे क्रायोप्रिजर्वेशन कहते हैं।
आजकल दुर्लभ पौधों को प्राकृतिक आवासों के बजाय सुरक्षित स्थानों पर उगाया जाता है। इसे उत्स्थाने (ex situ) संरक्षण कहते हैं। वानस्पतिक उद्यानों एवं चिड़ियाघरों की स्थापना का उद्देश्य यही है।
(7) ऊतक संवर्द्धन (Tissue Culture)-इस विधि का प्रयोग उन पौधों के लिए किया जाता है जिन पौधों में बीज नहीं बनता अथवा एक विशेष आनुवंशिक लक्षण का क्लोन तैयार करना हो।
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  1. संकरण से आप क्या समझते है ? इसकी आवश्यकता तथा नियमो का वर्णन कीजिए ।

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  2. पौघों में अवशोषण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए ।

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  3. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए - जैव विविधता के तप्त स्थल

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  4. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए। पोषी स्तर

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  5. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए। पारिस्थितिक पिरामिड

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  6. जैव विविधता बढ़ती है

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  7. जैव-विविधता संरक्षण में पवित्र उपवन और उनकी भूमिका क्या है?

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  8. जैव विविधता से क्या समझते हैं ?

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  9. जैव विविधता क्या है?

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  10. जैव विविधता के सभी आवश्यक घटकों के नाम लिखिए।

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